भारत के उत्तर-पश्चिमी कोने में बसा राजस्थान अपनी किलेबंदी, रेत के टीलों और लोक-संस्कृति के लिए जितना मशहूर है, उतना ही यह भूवैज्ञानिक दृष्टि से भी असाधारण है। राज्य की भूगर्भीय बनावट — विशेष रूप से विश्व की प्राचीनतम पर्वत श्रृंखलाओं में शुमार अरावली पट्टी — ने इसे धात्विक और अधात्विक खनिजों का इतना विशाल भंडार दिया है कि इसे “खनिजों का अजायबघर” (Museum of Minerals) कहा जाने लगा है। कृषि के बाद ग्रामीण रोजगार का दूसरा सबसे बड़ा साधन खनन क्षेत्र ही है, और यह राज्य सरकार के राजस्व का एक स्तंभ भी है।
2024 के बाद राजस्थान की खनिज अर्थव्यवस्था में तेज़ बदलाव आया है — राज्य की छठी खनिज नीति लागू हुई, देश की पहली पोटाश खान की नीलामी राजस्थान में हुई, यह सोना-खनन करने वाला चौथा राज्य बना, और पचपदरा रिफाइनरी जैसी मेगा परियोजना उत्पादन के करीब पहुंची। यह लेख CSIR NET (भू-विज्ञान), UPSC GSI, RAS, GATE, पटवारी और अन्य राजस्थान-केंद्रित परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के लिए राज्य के समस्त खनिज संसाधनों — पुराने और नवीनतम दोनों — का एक ही स्थान पर विस्तृत संग्रह प्रस्तुत करता है।
1. सांख्यिकीय अवलोकन: राजस्थान खनिज क्षेत्र की स्थिति
राज्य के खनिज क्षेत्र की वर्तमान स्थिति को निम्न आंकड़ों से समझा जा सकता है:
- खनिजों की विविधता: राज्य में लगभग 81-82 प्रकार के खनिज मौजूद हैं, जिनमें से वर्तमान में लगभग 57-58 प्रकार के खनिजों का व्यावसायिक खनन हो रहा है (इनमें राजस्थान खनिज नीति-2024 के अनुसार लगभग 22 प्रमुख खनिज व 36 गौण/अप्रधान खनिज शामिल हैं)।
- राष्ट्रीय योगदान: ईंधन खनिजों को छोड़कर, भारत के कुल खनिज उत्पादन मूल्य में राजस्थान का योगदान लगभग 22% है।
- भंडार में स्थान: खनिज भंडारों की दृष्टि से राजस्थान झारखंड के बाद देश में दूसरे स्थान पर है।
- उत्पादन में स्थान: खनिज उत्पादन की दृष्टि से झारखंड और मध्य प्रदेश के बाद राजस्थान तीसरे स्थान पर है।
- खानों की संख्या: देश में सर्वाधिक संख्या में सक्रिय खानें राजस्थान में ही स्थित हैं।
- राजस्व: वित्तीय वर्ष 2023-24 में खनिज क्षेत्र से राज्य को कुल लगभग ₹7,491 करोड़ का राजस्व मिला, जिसने राज्य की GSDP में लगभग 3.4% का योगदान दिया। गौण खनिजों में सर्वाधिक राजस्व चिनाई पत्थर (₹596 करोड़) से, इसके बाद ग्रेनाइट (₹312 करोड़) और मार्बल (₹284 करोड़) से प्राप्त हुआ।
एकाधिकार एवं अग्रणी स्थिति वाले खनिज
| श्रेणी | खनिज |
|---|---|
| एकाधिकार (लगभग 100% उत्पादन) | सीसा-जस्ता, चांदी, वोलेस्टोनाइट, जास्पर, सेलेनाइट, गार्नेट, पन्ना, मुल्तानी मिट्टी |
| अग्रणी/प्रथम स्थान | रॉक फॉस्फेट, जिप्सम, कैल्साइट, सोपस्टोन, बॉल क्ले, संगमरमर |
| महत्वपूर्ण स्थान | सीमेंट व स्टील ग्रेड चूना पत्थर, टंगस्टन, अभ्रक, तांबा, इमारती पत्थर |
2. धात्विक खनिज (Metallic Minerals)
अरावली बेल्ट के कारण राजस्थान विशेषकर अलौह धातुओं (Non-ferrous metals) में अत्यंत समृद्ध है।
2.1 सीसा-जस्ता (Lead-Zinc)
सीसा और जस्ता आमतौर पर एक साथ पाए जाने के कारण इन्हें “जुड़वा खनिज” (Twin Minerals) कहा जाता है। मुख्य अयस्क गैलेना (Galena) है; अन्य अयस्कों में कैलेमीन, जिंकाइट और विलेमाइट शामिल हैं। राजस्थान का सीसा-जस्ता उत्पादन में देश में 100% एकाधिकार है।
| जिला | प्रमुख क्षेत्र |
|---|---|
| उदयपुर | जावर (देश की सबसे पुरानी खानों में से एक), मोचिया-मगरा, बरोड़ मगरा, देबारी |
| भीलवाड़ा | रामपुरा-आगुचा (विश्व की सबसे समृद्ध जस्ता खानों में से एक) |
| राजसमंद | राजपुरा-दरीबा, सिंधेसर खुर्द |
| सवाई माधोपुर | चौथ का बरवाड़ा |
| अलवर | गुढ़ा-किशोरी दास |
औद्योगिक उपयोग: देबारी (उदयपुर) में भारत सरकार का उपक्रम हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड (HZL) स्थापित है (अब वेदांता समूह के प्रबंधन में)। चित्तौड़गढ़ के चंदेरिया में ब्रिटेन के सहयोग से स्थापित एशिया का सबसे बड़ा ‘सुपर जिंक स्मेल्टर’ कार्यरत है। राजसमंद के दरीबा में भी स्मेल्टर संयंत्र है।
2.2 चांदी (Silver)
चांदी स्वतंत्र रूप से कम पाई जाती है और मुख्यतः सीसा-जस्ता के उप-उत्पाद (By-product) के रूप में निकलती है। अयस्क: अर्जेन्टाइट, जाइराजाइट, हॉर्न सिल्वर। भारत की लगभग 90% से अधिक चांदी राजस्थान से उत्पादित होती है। शोधन पहले टुन्डू (बिहार) में होता था, अब चंदेरिया (चित्तौड़गढ़) के स्मेल्टर में ही निष्कर्षण होता है।
2.3 तांबा (Copper)
मानव सभ्यता द्वारा प्रयोग की गई पहली धातुओं में से एक, जिसकी विद्युत उद्योग में अत्यधिक मांग है। तांबे के भंडार की दृष्टि से राजस्थान का देश में दूसरा स्थान है (झारखंड/मध्य प्रदेश के बाद)।
| जिला | प्रमुख क्षेत्र |
|---|---|
| झुंझुनूं (‘ताम्र नगरी’) | खेतड़ी-सिंघाना (मदान-कुदान, कोलिहान खदानें) |
| अलवर | खो-दरीबा, भगोनी, प्रतापगढ़ |
| उदयपुर | देबारी, देलवाड़ा, अंजनी, केरावली |
| सिरोही | आबू-रोड, बसंतगढ़ |
| सीकर | बन्नों की ढाणी, रघुनाथपुरा |
| बीकानेर | बीदासर |
औद्योगिक इकाई: खेतड़ी (झुंझुनूं) में भारत सरकार का उपक्रम हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) कार्यरत है, जिसे अमेरिका और फ्रांस के तकनीकी सहयोग से स्थापित किया गया था। तांबे को गलाने की प्रक्रिया में सल्फ्यूरिक एसिड उप-उत्पाद के रूप में मिलता है, जिसका उपयोग सुपर-फॉस्फेट उर्वरक निर्माण में होता है।
2.4 टंगस्टन (Tungsten)
सामरिक महत्व (Strategic Importance) का खनिज, जिसका उपयोग रक्षा उपकरणों व उच्च तापसहन इस्पात में होता है; गलनांक बहुत उच्च। अयस्क: वुल्फ्रेमाइट और स्कीलाइट।
- नागौर: डेगाना की भाकरी व रेवत पहाड़ी — भारत की एकमात्र सक्रिय टंगस्टन खान रही है, यद्यपि उत्पादन आर्थिक कारणों से लंबे समय सीमित रहा।
- सिरोही: वाल्दा, आबूरोड (यहाँ पूर्व में ‘राजस्थान राज्य टंगस्टन विकास निगम’ द्वारा खनन कार्य हुआ)।
- पाली: नाना-कराबे।
ताज़ा अपडेट: डेगाना के टंगस्टन-लिथियम ब्लॉक (RAMB डेगाना) के लिए केंद्र सरकार ने 16 सितंबर 2025 को छठे चरण की क्रिटिकल मिनरल्स नीलामी के अंतर्गत निविदा (NIT) जारी की है, जिससे यह दशकों से ठप पड़ा खनन क्षेत्र दोबारा सक्रिय होने की संभावना है।
2.5 मैंगनीज (Manganese)
मुख्य उपयोग इस्पात उद्योग (Ferro-alloys) में। अयस्क: साइलोमैलीन, ब्रोनाइट, पाइरोलुसाइट। यह खनिज मुख्यतः राज्य के दक्षिणी भाग में मिलता है।
- बांसवाड़ा (सर्वाधिक भंडार): लीलवाना, तलवाड़ा, सागवा, तामेसर, कालाखूंटा।
- उदयपुर: देबारी, स्वरूपपुरा, नेगाड़िया।
- राजसमंद: नाथद्वारा।
2.6 लौह अयस्क (Iron Ore)
राजस्थान में मध्यम से उच्च श्रेणी का लौह अयस्क मिलता है — मुख्यतः हेमेटाइट (Haematite) किस्म; अन्य प्रकार मैग्नेटाइट, लिमोनाइट, सिडेराइट हैं।
- जयपुर (सर्वाधिक भंडार): मोरीजा-बानोल (चौमू), रामपुरा।
- दौसा: नीमला-राइसेला।
- उदयपुर: नाथरा की पाल, थूर-हुण्डेर।
- अलवर: राजगढ़, पूर्वा।
- झुंझुनूं: डाबला-सिंघाना।
2.7 सोना (Gold)
हाल के वर्षों में राजस्थान के स्वर्ण भंडारों में मिली सफलता ने राज्य को देश के सोना-उत्पादक राज्यों के नक्शे पर ला दिया है।
प्रमुख क्षेत्र: बांसवाड़ा (आनंदपुर-भुकिया, जगपुरा, तिमारन माता, संजेला, मानपुर, कांकरिया), उदयपुर (रायपुर, खेड़न, डेगोचा), डूंगरपुर (आमझरा, चादर की पाल, भारकुंडी)। नए संकेत दौसा (ढाणी बसेड़ी), सवाई माधोपुर, अलवर और अजमेर जिलों में भी मिले हैं।
ताज़ा स्थिति (2025-26):
- भूकिया-जगपुरा (घाटोल तहसील, बांसवाड़ा) की लगभग 940 हेक्टेयर भूमि में 113.52 मिलियन टन स्वर्ण अयस्क का प्रारंभिक आकलन है, जिसमें लगभग 222-226 टन सोना धातु शामिल है — अनुमानित मूल्य लगभग ₹1.12 लाख करोड़। यहाँ सोने के साथ-साथ तांबा (1.74 लाख टन से अधिक), निकल (9,700 टन से अधिक) और कोबाल्ट (13,500 टन से अधिक) भी मिलने का अनुमान है।
- खनन लाइसेंस की ई-नीलामी में रतलाम की एक फर्म को लाइसेंस मिला (65.30% रेवेन्यू-शेयर बिड के साथ) — इसी के साथ राजस्थान कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और झारखंड के बाद सोना खनन करने वाला देश का चौथा राज्य बन गया। बाद में धरोहर राशि जमा न होने से यह टेंडर निरस्त हुआ और इसका पुनः टेंडर जारी किया गया।
- घाटोल क्षेत्र के कांकरिया गांव में तीसरी स्वर्ण खदान की पुष्टि हुई है — लगभग 222.39 टन शुद्ध सोना और 11 करोड़ टन से अधिक अयस्क का अनुमान, जिससे बांसवाड़ा को भारत का ‘स्वर्ण गढ़’ कहा जाने लगा है। अनुमान है कि यह क्षेत्र भारत की कुल सोने की मांग का लगभग 25% तक पूर्ति कर सकता है।
- राष्ट्रीय परिदृश्य में भारत के अनुमानित कुल स्वर्ण भंडार (~654 मीट्रिक टन) में बिहार के बाद राजस्थान का स्थान है, जहाँ लगभग 235 मीट्रिक टन भंडार आंका गया है।
3. अधात्विक खनिज (Non-Metallic Minerals)
अधात्विक खनिजों के मामले में राजस्थान देश का सिरमौर है — ये खनिज उद्योगों की रीढ़ माने जाते हैं।
3.1 रॉक फॉस्फेट (Rock Phosphate)
महत्वपूर्ण उर्वरक खनिज; देश का लगभग 90% रॉक फॉस्फेट राजस्थान में मिलता है। उपयोग: सुपर फॉस्फेट खाद और लवणीय/क्षारीय भूमि के उपचार में।
- उदयपुर: झामर-कोटड़ा (सर्वाधिक उत्पादन, इस खदान को सर्वश्रेष्ठ खदान का पुरस्कार मिल चुका है), नीमच माता, बैलगढ़, सीसारमा।
- जैसलमेर: बिरमानिया, लाठी सीरीज।
- सीकर: कर्पुरा।
- बांसवाड़ा: सालोपत।
संयंत्र: RSMML (पूर्व RSMDC) द्वारा झामर-कोटड़ा में ‘रॉक फॉस्फेट बेनिफिशियेशन संयंत्र’ स्थापित है।
3.2 जिप्सम (Gypsum)
स्थानीय नाम ‘हरसौंठ’/’खड़िया मिट्टी’; रवेदार रूप ‘सेलेनाइट’ कहलाता है। उपयोग: अमोनियम सल्फेट खाद, सीमेंट उद्योग, प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP), क्षारीय भूमि सुधार।
- नागौर (सर्वाधिक भंडार): भदवासी, गोठ-मांगलोद, धाकोरिया।
- बीकानेर: जामसर (देश की सबसे बड़ी खान), पूगल, बिसरासर, हरकासर।
- जैसलमेर: मोहनगढ़, चांदन, मचाना।
- हनुमानगढ़/गंगानगर: किशनपुरा, सूरतगढ़।
3.3 चूना पत्थर (Limestone)
राज्य में सर्वाधिक पाया जाने वाला ‘सर्वव्यापी’ खनिज और सीमेंट उद्योग का मुख्य कच्चा माल।
| श्रेणी (Grade) | प्रमुख क्षेत्र |
|---|---|
| केमिकल ग्रेड | जोधपुर (बिलाड़ा), नागौर |
| स्टील/SMS ग्रेड | सानू (जैसलमेर) — अत्यंत उच्च गुणवत्ता, इस्पात संयंत्रों में प्रयुक्त; उदयपुर में भी मिलता है |
| सीमेंट ग्रेड | चित्तौड़गढ़ (हब), नागौर, बूंदी, कोटा, बांसवाड़ा |
प्रमुख क्षेत्र: चित्तौड़गढ़ (सर्वाधिक — निंबाहेड़ा, मांगरोल, शंभुपुरा, भैंसरोड़गढ़), जैसलमेर (सानू, रामगढ़/सोनू), नागौर (गोटन, मूंडवा), बूंदी (लाखेरी — यहीं राज्य की पहली सीमेंट फैक्ट्री 1915 में खुली थी)।
3.4 वोलेस्टोनाइट (Wollastonite)
भारत में इसका खनन लगभग केवल राजस्थान में होता है (एकाधिकार)। उपयोग: पेंट, कागज, सिरेमिक टाइल्स, कृषि कार्य। क्षेत्र: सिरोही (खिल्ला, बेलका — प्रमुख), उदयपुर (खेड़ा, सायरा), अजमेर (रूपनगढ़)।
3.5 अभ्रक (Mica)
विद्युत का कुचालक (Insulator)। सफेद अभ्रक ‘रूबी’ और गुलाबी अभ्रक ‘बायोटाइट’ कहलाता है। भीलवाड़ा में अभ्रक की ईंट बनाने का कारखाना है; अभ्रक के चूरे से चादरें बनाने की प्रक्रिया ‘माइकेनाइट’ कहलाती है। क्षेत्र: भीलवाड़ा (‘अभ्रक नगरी’ — दांता, टूंका, भुणास, फूलिया), उदयपुर (चंपागुढ़ा, सरवाड़), अजमेर (मसूदा, भिनाय)।
3.6 गार्नेट / तामड़ा / रक्तमणि (Garnet)
बहुमूल्य रत्न, जिसमें राजस्थान का एकाधिकार है; यह रत्न (Gem) और घिसने वाले पदार्थ (Abrasive) दोनों रूपों में मिलता है। क्षेत्र: टोंक (राजमहल — सर्वाधिक प्रसिद्ध, कल्याणपुरा), अजमेर (सरवाड़)।
3.7 पन्ना (Emerald)
‘हरी अग्नि’ (Green Fire) के नाम से प्रसिद्ध। सर्वप्रथम 1943 में कालागुमान क्षेत्र में खोजा गया। राजसमंद से अजमेर तक फैली पट्टी को ‘ग्रीन फायर बेल्ट’ कहा जाता है। क्षेत्र: राजसमंद (कालागुमान, टिक्की), अजमेर (बुबानी, राजगढ़), उदयपुर (गोगुंदा)। ब्रिटेन की एक कंपनी ने बुबानी (अजमेर) से गमगुढ़ा (राजसमंद) के बीच ‘फाइन ग्रेड पन्ने’ के विशाल भंडार खोजे हैं।
3.8 फ्लोराइट / फ्लोर्सपार (Fluorite)
उपयोग: सिरेमिक, रासायनिक उद्योग, रत्न पॉलिश। क्षेत्र: डूंगरपुर (मांडो की पाल — फ्लोर्सपार बेनिफिशियेशन संयंत्र, काहिला), जालौर (भीनमाल/करड़ा)।
3.9 चीनी मिट्टी (China Clay / Kaolin)
उपयोग: सिरेमिक बर्तन, विद्युत रोधी उपकरण। क्षेत्र: बीकानेर (पलाना, मुध, कोटड़ी), सवाई माधोपुर (रायसीना, बसु), सीकर (नीम का थाना — यहाँ धुलाई कारखाना है)।
3.10 एस्बेस्टॉस (Asbestos)
‘रॉक वूल’ या ‘मिनरल सिल्क’ भी कहा जाता है; आग में नहीं जलता। राजस्थान में मुख्यतः एम्फीबोल किस्म मिलती है। क्षेत्र: उदयपुर (ऋषभदेव, खेरवाड़ा), राजसमंद (नाथद्वारा), डूंगरपुर (देवल, पीपरदा)। स्वास्थ्य कारणों से इसके खनन पर कई प्रतिबंध हैं।
3.11 बेन्टोनाइट (Bentonite)
पानी में भिगोने पर फूल जाता है। उपयोग: तेल शोधन (Refining), ड्रिलिंग मड (Drilling Mud)। क्षेत्र: बाड़मेर (हाथी की ढाणी, गिरल, अकाली)।
3.12 पोटाश (Potash) — परंपरागत से सामरिक खनिज तक
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने नागौर-गंगानगर बेसिन में पोटाश के विशाल भंडारों की पुष्टि की है — लगभग 2,476.58 मिलियन टन के अनुमानित भंडार, जो श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, चूरू और नागौर के कुछ हिस्सों में लगभग 30,000 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले हैं। बीकानेर, हंसेरा, अर्जुनसर, घड़सीसर, जैतपुर, सतीपुरा, भरूसरी और लाखासर के पास 8 उप-बेसिन केंद्र चिह्नित किए गए हैं। जमीन में गहराई पर स्थित होने के कारण इसे निकालने हेतु ‘सोल्यूशन माइनिंग’ (Solution Mining) तकनीक प्रस्तावित है।
ताज़ा स्थिति (2025): देश का लगभग 91% पोटाश भंडार राजस्थान के नागौर जिले में है (इसके बाद मध्य प्रदेश का पन्ना जिला ~5% और उत्तर प्रदेश के सोनभद्र-चित्रकूट जिले ~4%)। भारत प्रतिवर्ष लगभग 5 मिलियन टन पोटाश का आयात करता है (कनाडा, रूस, बेलारूस, तुर्कमेनिस्तान आदि से), जिस पर लगभग ₹10,000 करोड़ खर्च होते हैं। मई 2025 में केंद्र सरकार ने क्रिटिकल मिनरल्स नीलामी के पांचवें चरण में देश की पहली पोटाश व हैलाइट खनन ब्लॉक नीलामी सफलतापूर्वक संपन्न की — यह राजस्थान में किसी भी स्ट्रेटेजिक/क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक की पहली सफल नीलामी थी।
4. इमारती पत्थर (Building Stones)
4.1 संगमरमर (Marble)
राजस्थान भारत का 95% से अधिक संगमरमर उत्पादित करता है। किशनगढ़ (अजमेर) में एशिया की सबसे बड़ी मार्बल मंडी स्थित है।
| रंग/किस्म | प्रमुख क्षेत्र |
|---|---|
| सफेद (केल्साइटिक) | मकराना, नागौर — ताजमहल इसी संगमरमर से बना है |
| सफेद (अन्य, सर्वाधिक उत्पादन) | राजसमंद (राजनगर, मोरवाड़) |
| काला | भैंसलाना, जयपुर |
| हरा (सर्पेन्टाइन) | उदयपुर (ऋषभदेव), डूंगरपुर |
| लाल | धौलपुर |
| गुलाबी | भरतपुर, जालौर (बाबरमाल) |
| पीला | जैसलमेर (पिथला) |
| सतरंगी | पाली (खांदरा) |
| बादामी | जोधपुर |
4.2 ग्रेनाइट (Granite)
जालौर को “ग्रेनाइट सिटी” कहा जाता है। गुलाबी: जालौर (बाबरमाल)। मरकरी लाल: बाड़मेर (सिवाना)। काला: जयपुर (कालाडेरा)। पीला: जैसलमेर (पिथला)।
5. ऊर्जा संसाधन (Energy Resources)
कोयला, पेट्रोलियम और गैस के उत्पादन में राजस्थान एक ऊर्जा-शक्ति के रूप में उभरा है।
5.1 कोयला (Coal)
राजस्थान में टर्शियरी युग का लिग्नाइट (Lignite/’भूरा कोयला’) प्रकार का कोयला मिलता है। तमिलनाडु के बाद लिग्नाइट भंडार में राजस्थान का देश में दूसरा स्थान है।
- बाड़मेर: कपूरड़ी, जालिपा (गिरल — यहाँ भूमिगत गैसीकरण परियोजना भी है), भादरेश।
- बीकानेर: पलाना (सबसे अच्छी गुणवत्ता), बरसिंहसर (NLC द्वारा संचालित), बीठनोक, हाड़ला।
- नागौर: मेड़ता रोड, मातासुख, कसनऊ, इग्यार।
5.2 पेट्रोलियम / खनिज तेल (Petroleum)
राजस्थान बॉम्बे हाई के बाद भारत में कच्चे तेल (Crude Oil) का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, जो देश के कुल उत्पादन का लगभग 20-22% उत्पादित करता है।
भूगर्भिक बेसिन: बाड़मेर-सांचौर बेसिन (सर्वाधिक उत्पादक), जैसलमेर बेसिन, बीकानेर-नागौर बेसिन।
प्रमुख तेल क्षेत्र: बाड़मेर का मंगला क्षेत्र (सबसे बड़ा, खोज वर्ष 2004), भाग्यम और ऐश्वर्या — तीनों मिलकर ‘MBA त्रिकोण’ कहलाते हैं। अन्य कुएं: सरस्वती, रागेश्वरी, कामेश्वरी, गुढा, शक्ति, विजया। प्रमुख कंपनियां: केयर्न एनर्जी (वेदांता), ONGC, ऑयल इंडिया लिमिटेड।
पचपदरा रिफाइनरी परियोजना (HRRL) — राजस्थान की सबसे बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं में से एक
बाड़मेर/बालोतरा के पचपदरा में HPCL राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (HRRL) स्थापित की जा रही है — HPCL (74% हिस्सेदारी) और राजस्थान सरकार (26% हिस्सेदारी) का संयुक्त उद्यम। यह देश की पहली ऐसी परियोजना है जिसमें रिफाइनरी के साथ पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स भी एकीकृत है और यह BS-VI मानक ईंधन का उत्पादन करेगी।
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| क्षमता | 9 MMTPA (रिफाइनरी) + 2.4 MMTPA (पेट्रोकेमिकल) |
| स्वीकृत लागत (संशोधित) | ₹79,459 करोड़ (मूल लागत ₹43,129 करोड़ से बढ़ाई गई) |
| HPCL की कुल इक्विटी | ₹19,600 करोड़ |
| उत्पाद | पेट्रोल (~1 MMTPA), डीजल (~4 MMTPA), पॉलीप्रोपिलीन, LLDPE, HDPE, बेंज़ीन-टॉल्यूईन-ब्यूटाडाईन |
| रोजगार सृजन (निर्माण अवधि) | लगभग 25,000 श्रमिक |
| SCOD (व्यावसायिक उत्पादन तिथि) | 1 जुलाई 2026 |
ताज़ा स्थिति (जून 2026): परियोजना का शिलान्यास 2013 में हुआ था (तब लागत ₹37,230 करोड़ आंकी गई थी)। 21 अप्रैल 2026 को प्रस्तावित उद्घाटन से एक दिन पहले (20 अप्रैल 2026) क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (CDU-VDU सेक्शन) के एक एक्सचेंजर में आग/विस्फोट की घटना के बाद उद्घाटन कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया। मरम्मत कार्य तेज़ी से पूरा होने के बाद 1 जून 2026 से CDU की कमीशनिंग शुरू हुई, और जून 2026 के दौरान ही पेट्रोल-डीजल का व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा औपचारिक उद्घाटन जोधपुर एयरपोर्ट के उद्घाटन के साथ जुलाई 2026 की शुरुआत में संभावित है। भविष्य में बालोतरा-पचपदरा रेलवे लाइन के निर्माण की भी योजना है।
5.3 प्राकृतिक गैस (Natural Gas)
जैसलमेर बेसिन गैस का मुख्य केंद्र है। क्षेत्र: घोटारू (हीलियम मिश्रित गैस), मनिहारी टिब्बा, डांडेवाला, तनोट, रामगढ़ (गैस आधारित बिजलीघर), गमनेवाला। हजीरा-बीजापुर-जगदीशपुर (HBJ) पाइपलाइन राजस्थान के अंता (बारां) और गढेपान (कोटा) से गुजरती है।
5.4 यूरेनियम (Uranium)
आणविक खनिज। सीकर के रोहिल (खंडेला) क्षेत्र में यूरेनियम के विशाल भंडार मिले हैं, जिसके खनन हेतु Letter of Intent जारी किया जा चुका है। अन्य क्षेत्र: उदयपुर (उमरा), टोंक, बूंदी।
6. क्रिटिकल एवं रणनीतिक खनिज (Critical & Strategic Minerals) — 2024-2026 की बड़ी प्रगति
खनिज खोज में नवीनतम राष्ट्रीय प्राथमिकता रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REE), लिथियम और अन्य क्रिटिकल मिनरल्स पर केंद्रित है, और राजस्थान इसमें अग्रणी राज्य बनकर उभरा है।
- रेयर अर्थ व क्रिटिकल मिनरल एक्सप्लोरेशन लाइसेंस में देश का पहला राज्य: राजस्थान रेयर अर्थ, रेयर मेटल और पोटाश मिनरलाइजेशन के लिए एक्सप्लोरेशन लाइसेंस जारी करने वाला भारत का पहला राज्य बना। तीन प्रमुख ब्लॉक चिह्नित किए गए हैं:
- छाबा-नावाताला-पटौदी (बाड़मेर-जोधपुर) — REE संकेत, लगभग 574 वर्ग किमी क्षेत्र।
- रेनवाल-रैथल-कालाडेरा (जयपुर-सीकर-नागौर) — लगभग 789.40 वर्ग किमी क्षेत्र।
- सारासर-पल्लू-धांधूसर-हरदासवाली (हनुमानगढ़-गंगानगर-चूरू-बीकानेर) — पोटाश संकेत।
- रेयर अर्थ खनिजों का उपयोग कंप्यूटर मैमोरी, DVD, रिचार्जेबल बैटरी, मोबाइल फोन, कैटेलिटिक कन्वर्टर्स, मैग्नेट और फ्लोरोसेंट लाइट में होता है — इनका खनन शुरू होने से चीन पर निर्भरता घटेगी।
- कानूनी आधार: अगस्त 2023 में MMDR अधिनियम में संशोधन करके केंद्र सरकार ने गहराई वाले व रणनीतिक 29 खनिजों के लिए नई ‘एक्सप्लोरेशन लाइसेंस (EL) नीति’ बनाई थी, जिसके अंतर्गत ये ब्लॉक चिह्नित हुए। MMDR संशोधन अधिनियम, 2015 के बाद से GSI ने राजस्थान में चूना पत्थर, आधार धातु, सोना, REE, ग्लूकोनाइट, नाइओबियम-टैंटालम, मैंगनीज, लिथियम, टंगस्टन, पोटाश व चांदी जैसे संसाधनों की खोज में लगातार वृद्धि की है।
- AI-ML आधारित अन्वेषण: राजस्थान राज्य खान एवं खनिज एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट (RSMET) और IIT हैदराबाद के बीच क्रिटिकल व स्ट्रेटेजिक मिनरल्स के अन्वेषण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) व मशीन लर्निंग (ML) तकनीक के उपयोग हेतु MoU हुआ है — चार चरणों में चलने वाली यह परियोजना 18 महीनों में पूरी होगी।
- पोटाश की ऐतिहासिक नीलामी और डेगाना का टंगस्टन-लिथियम पुनरुद्धार — दोनों का विवरण ऊपर संबंधित खनिज के अंतर्गत दिया गया है।
7. संस्थागत ढांचा (Institutional Framework)
| संस्था | विवरण |
|---|---|
| राजस्थान राज्य खान एवं खनिज लिमिटेड (RSMML) | मूलतः 1948 में ‘बीकानेर जिप्सम लिमिटेड’ के रूप में स्थापित; 1974 में नाम बदलकर RSMML किया गया; मुख्यालय उदयपुर; कार्य — रॉक फॉस्फेट, जिप्सम, लाइमस्टोन व लिग्नाइट का यंत्रीकृत खनन व विपणन |
| खान एवं भूविज्ञान विभाग (DMG) | मुख्यालय उदयपुर; खनिज नीतियों का निर्माण, सर्वेक्षण और खनन पट्टों (Leases) का आवंटन |
| राजस्थान राज्य खनिज विकास निगम (RSMDC) | स्थापना 1979; 2003 में दोहराव से बचने व दक्षता बढ़ाने हेतु इसका RSMML में विलय कर दिया गया |
हाल की प्रमुख नीतियां (2024-2025)
- राजस्थान खनिज नीति-2024 (राज्य की छठी खनिज नीति): 4 दिसंबर 2024 को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा राइजिंग राजस्थान समिट से पूर्व 9 अन्य नीतियों के साथ लॉन्च की गई। लक्ष्य — GDP में खनिज क्षेत्र की मौजूदा 3.4% हिस्सेदारी को बढ़ाना; 2029-30 तक 50 लाख और 2046-47 तक 1 करोड़ लोगों के लिए रोजगार सृजन; राजस्व को 2029-30 तक तीन गुना और 2046-47 तक ₹1 लाख करोड़ वार्षिक तक बढ़ाना; अगले 5 वर्षों में प्रमुख खनिज के 50 ब्लॉकों की नीलामी; जनजातीय क्षेत्र में बिड सिक्योरिटी घटाकर ₹5 लाख करना।
- राजस्थान एम-सैंड नीति-2024: निर्माण कार्यों में बजरी (River Sand) के स्थान पर एम-सैंड (कृत्रिम बजरी) के उपयोग को बढ़ावा; सरकारी/सरकार-वित्तपोषित निर्माण कार्यों में 25% एम-सैंड उपयोग अनिवार्य; नई इकाइयों के लिए पूर्व अनुभव व नेटवर्थ की बाध्यता समाप्त; इन इकाइयों को RIPS-2024 के परिलाभ भी मिलेंगे।
- माइनर मिनरल कंसेशन रूल्स (MMCR) 2024: जनवरी 2025 में अधिसूचित — इन नई नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु; गैप क्षेत्र आवंटन में रिज़र्व प्राइस 10 गुणा से 25 गुणा बढ़ाया गया; जनजातीय क्षेत्र में बिड सिक्योरिटी ₹10 लाख से ₹5 लाख की गई; ₹30 करोड़ से अधिक की बोली पर फर्जी बिड रोकने हेतु 25% बिड सिक्योरिटी अनिवार्य; अवैध खनन पर जीरो टॉलरेंस के तहत जियो-फेंसिंग, GPS ट्रैकिंग व RFID चेकपोस्ट लागू।
8. जिला-वार प्रमुख खनिज: त्वरित संदर्भ तालिका
| जिला | प्रमुख खनिज |
|---|---|
| उदयपुर | सीसा-जस्ता, रॉक फॉस्फेट, एस्बेस्टॉस, मैंगनीज, तांबा |
| भीलवाड़ा | जस्ता (रामपुरा-आगुचा), अभ्रक |
| राजसमंद | सीसा-जस्ता, संगमरमर, पन्ना |
| झुंझुनूं | तांबा (खेतड़ी) |
| बांसवाड़ा | मैंगनीज, सोना |
| नागौर | जिप्सम, संगमरमर (मकराना), टंगस्टन, पोटाश, चूना पत्थर |
| बीकानेर | जिप्सम, कोयला/लिग्नाइट, चीनी मिट्टी |
| जैसलमेर | जिप्सम, चूना पत्थर, प्राकृतिक गैस, संगमरमर (पीला) |
| बाड़मेर | पेट्रोलियम, लिग्नाइट, बेन्टोनाइट, ग्रेनाइट |
| अजमेर | वोलेस्टोनाइट, अभ्रक, पन्ना, संगमरमर मंडी (किशनगढ़) |
| सिरोही | वोलेस्टोनाइट, टंगस्टन |
| टोंक | गार्नेट |
| जालौर | ग्रेनाइट, संगमरमर (गुलाबी) |
| डूंगरपुर | फ्लोराइट, सोना, एस्बेस्टॉस |
| सीकर | यूरेनियम, चीनी मिट्टी, तांबा, पाइराइट्स (सलादीपुरा) |
| चित्तौड़गढ़ | चूना पत्थर/सीमेंट, चांदी शोधन (चंदेरिया) |
| जयपुर | लौह अयस्क, संगमरमर (काला), ग्रेनाइट (काला) |
| धौलपुर | संगमरमर (लाल) |
9. महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर संग्रह (Key Facts & Quick Revision)
| बिंदु | उत्तर |
|---|---|
| खनिजों का अजायबघर | राजस्थान |
| फ्लोराइट और वोलेस्टोनाइट में राजस्थान का स्थान | प्रथम (एकाधिकार) |
| अलौह खनिजों में स्थिति | अत्यंत समृद्ध (प्रथम/द्वितीय) |
| लौह अयस्क में स्थिति | चौथा |
| गुलाबी ग्रेनाइट | जालौर |
| हरी अग्नि (Green Fire) | पन्ना (Emerald) |
| फैल्सपार (Feldspar) — भारत में सर्वाधिक | मकरेड़ा, अजमेर |
| सुपर जिंक स्मेल्टर | चंदेरिया, चित्तौड़गढ़ |
| सोने के प्रमुख भंडार | आनंदपुर-भुकिया, बांसवाड़ा |
| हीरा (Diamond) | केसरपुरा (प्रतापगढ़/चित्तौड़गढ़ क्षेत्र) |
| नमक उत्पादन में स्थान | तीसरा-चौथा (अंतर्देशीय नमक में प्रथम — सांभर झील) |
| जिप्सम सर्वाधिक | नागौर-बीकानेर बेल्ट |
| चांदी की प्रमुख खान | जावर (उदयपुर) व रामपुरा-आगुचा |
| वर्मीक्यूलाइट व मैग्नेसाइट | अजमेर |
| रॉक फॉस्फेट की प्रमुख खान | झामर-कोटड़ा, उदयपुर |
| मुल्तानी मिट्टी (Fuller’s Earth) | बाड़मेर व बीकानेर (एकाधिकार) |
| पाइराइट्स (‘झूठा सोना’) | सलादीपुरा, सीकर |
| भारत का प्रथम तेल कुआं (तुलनात्मक तथ्य) | डिग्बोई, असम |
| देश का ~91% पोटाश भंडार | नागौर जिला, राजस्थान |
| रेयर अर्थ एक्सप्लोरेशन लाइसेंस में देश का प्रथम राज्य | राजस्थान |
| सोना खनन करने वाला देश का चौथा राज्य | राजस्थान (कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, झारखंड के बाद) |
| राजस्थान की छठी खनिज नीति | खनिज नीति-2024 (4 दिसंबर 2024) |
| पचपदरा रिफाइनरी की संशोधित लागत | ₹79,459 करोड़ |
10. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
राजस्थान को “खनिजों का अजायबघर” क्यों कहा जाता है?
राज्य में लगभग 81-82 प्रकार के खनिज पाए जाते हैं और लगभग 57-58 प्रकार के खनिजों का व्यावसायिक खनन होता है, जिससे यह देश का सबसे खनिज-विविध राज्य बन जाता है।
राजस्थान का कौन-सा खनिज उत्पादन में पूर्ण एकाधिकार रखता है?
सीसा-जस्ता, चांदी, वोलेस्टोनाइट, जास्पर, सेलेनाइट, गार्नेट, पन्ना और मुल्तानी मिट्टी के उत्पादन में राजस्थान का लगभग पूर्ण एकाधिकार है।
देश की पहली पोटाश खान की नीलामी कब और कहाँ हुई?
मई 2025 में केंद्र सरकार ने क्रिटिकल मिनरल्स नीलामी के पांचवें चरण में राजस्थान में देश की पहली पोटाश व हैलाइट खनन ब्लॉक की सफल नीलामी की।
राजस्थान सोना खनन करने वाला कौन-सा राज्य बना है?
भूकिया-जगपुरा (बांसवाड़ा) में खनन लाइसेंस की नीलामी के साथ राजस्थान कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और झारखंड के बाद देश का चौथा सोना-खनन राज्य बना।
पचपदरा रिफाइनरी (HRRL) की वर्तमान स्थिति क्या है?
अप्रैल 2026 में एक अग्नि दुर्घटना के बाद उद्घाटन स्थगित हुआ, मरम्मत के बाद 1 जून 2026 से CDU की कमीशनिंग शुरू हुई और जून 2026 में ही व्यावसायिक उत्पादन प्रारंभ होने की उम्मीद है; पूर्ण उद्घाटन जुलाई 2026 की शुरुआत में संभावित है।
राजस्थान खनिज नीति-2024 के मुख्य लक्ष्य क्या हैं?
2046-47 तक खनिज क्षेत्र से ₹1 लाख करोड़ वार्षिक राजस्व और 1 करोड़ रोजगार सृजित करना, तथा अगले 5 वर्षों में 50 प्रमुख खनिज ब्लॉकों की नीलामी करना।
रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REE) के लिए राजस्थान में कौन-से ब्लॉक चिह्नित हैं?
बाड़मेर-जोधपुर का छाबा-नावाताला-पटौदी ब्लॉक और जयपुर-सीकर-नागौर का रेनवाल-रैथल-कालाडेरा ब्लॉक प्रमुख REE-संकेत क्षेत्र हैं।
ताजमहल का संगमरमर किस खदान से लाया गया था?
मकराना, नागौर की खदानों से — यह सफेद केल्साइटिक संगमरमर के लिए प्रसिद्ध है।
11. निष्कर्ष
राजस्थान की खनिज संपदा राज्य के आर्थिक विकास का इंजन है। सीसा-जस्ता और संगमरमर जैसे पारंपरिक खनिजों के साथ-साथ अब ऊर्जा खनिजों (तेल, गैस, यूरेनियम) और भविष्य के खनिजों (पोटाश, रेयर अर्थ एलिमेंट्स, लिथियम) की खोज ने राजस्थान को वैश्विक निवेश के मानचित्र पर ला खड़ा किया है। खनिज नीति-2024, एम-सैंड नीति और AI-आधारित अन्वेषण जैसी पहलें मूल्य संवर्धन (Value Addition) और सतत खनन (Sustainable Mining) पर ज़ोर दे रही हैं, जिससे यह विषय आने वाले समय में राजस्थान-केंद्रित परीक्षाओं में करेंट अफेयर्स और स्टैटिक GK दोनों दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बना रहेगा।
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