अध्याय XXI

CrPC Section 264 in Hindi: संक्षिप्त विचारित मामलों में निर्णय

New Law Update (2024)

धारा 314 बी.एन.एस.एस.

TRIAL COURT

मजिस्ट्रेट न्यायालय (संक्षिप्त विचारण)

Punishment​

प्रक्रियात्मक – निर्णय / दंडादेश

Bailable?

Compoundable?

Bare Act Text

प्रत्येक संक्षिप्त विचारित मामले में, जिसमें अभियुक्त अपना दोष स्वीकार नहीं करता है, मजिस्ट्रेट साक्ष्य का सारांश और निष्कर्ष के कारणों का संक्षिप्त कथन अंतर्विष्ट करते हुए एक निर्णय अभिलिखित करेगा।

Important Sub-Sections Explained

Landmark Judgements

राम प्रसाद शर्मा बनाम बिहार राज्य, ए.आई.आर. 1968 एस.सी. 932:

सर्वोच्च न्यायालय ने संक्षिप्त विचारणों में भी निर्णयों में कारणों को अभिलिखित करने के मौलिक महत्व पर बल दिया। इसने इस बात पर प्रकाश डाला कि कारणों की आवश्यकता यह सुनिश्चित करती है कि अपीलीय या पुनरीक्षण न्यायालय निष्कर्षों की शुद्धता का आकलन कर सके और यह दर्शाती है कि न्यायिक मन को प्रस्तुत तथ्यों और साक्ष्य पर लागू किया गया है।

कर्नाटक राज्य बनाम एच.के. गंगाधर, 1994 क्रि.एल.जे. 912 (कर):

इस निर्णय ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 264 के तहत ‘साक्ष्य के सारांश’ के दायरे को स्पष्ट किया। इसमें यह माना गया कि यद्यपि विस्तृत अभिलेख आवश्यक नहीं है, तथापि अभिलिखित सारांश अभियोजन और बचाव पक्ष के साक्ष्य के सार को दर्शाने के लिए पर्याप्त होना चाहिए, जिससे उच्च न्यायालय मजिस्ट्रेट के निष्कर्ष के आधार और दिए गए कारणों को समझ सके।

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