Aamer Ka Kchhvaha Vnsh Free Mock Test – Part 6

Aamer Ka Kchhvaha Vnsh Free Mock Test – Part 6

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Aamer Ka Kchhvaha Vnsh Free Mock Test – Part 6

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निम्न में से आमेर के किस शासक ने तीन मुगल बादशाहों की सेवा की –

(ब) मिर्जा राजा जयसिंह Explanation: मिर्जा राजा जयसिंह व्याख्या : भावसिंह के उपरान्त जयसिंह-प्रथम शासक बना। जयसिंह प्रथम ने तीन मुगल सम्राटों जहाँगीर (1605-1627 ई.), शाहजहाँ (1628-1658 ई.) और औरंगजेब (1658-1707 ई.) की सेवा की।

‘मिर्जाराजा’ की उपाधि किसे प्रदान की गई थी –

(स) राजा जयसिंह प्रथम Explanation: राजा जयसिंह प्रथम व्याख्या : शाहजहाँ ने 1638 ई. में जयसिंह प्रथम को मिर्जा राजा की पदवी से विभूषित किया।

जगत शिरोमणि मंदिर किसके द्वारा बनवाया गया –

(अ) मानसिंह Explanation: मानसिंह व्याख्या : मानसिंह ने बंगाल की देखरेख के लिए अपने पुत्र जगतसिंह को नियुक्त करवाया, परन्तु अभाग्यवश 1599 ई. में उसकी आकस्मिक मृत्यु हो गयी। जगतसिंह की मृत्यु के बाद इसकी स्मृति में आमेर के महलों में जगत शिरोमणि मंदिर का निमार्ण करवाया गया।

मुगलों के साथ समर्पण और सहयोग की नीति का पालन करने वाला प्रथम राज्य था –

(स) आमेर Explanation: आमेर व्याख्या : आमेर राजस्थान का पहला राज्य था जिसने मुगलों के साथ सहयोग और समर्पण की नीति अपनाई। 1562 ई. में, आमेर के कछवाहा शासक राजा भारमल ने अकबर की अजमेर यात्रा के दौरान अकबर की अधीनता स्वीकार की। बाद में, उन्होंने अपनी पुत्री जोधाबाई की शादी अकबर से कर वैवाहिक संबंधों के माध्यम से मुगलों के साथ सहयोग की नीति का शुभारंभ किया।

1733 ई. में ‘जीज मुहम्मद शाही’ पुस्तक जो नक्षत्रों संबंधी ज्ञान से संबंधित है, के लेखक हैं –

(स) जयपुर के सवाई जयसिंह Explanation: जयपुर के सवाई जयसिंह व्याख्या : सवाई जयसिंह ने 1725 ई. में ग्रह नक्षत्रों की शुद्ध सारणी का निर्माण करवाया और उसका नाम जीज-ए-मुहम्मद शाही रखा।

राजपूतों द्वारा मराठों के विरूद्ध हुरड़ा नामक स्थान पर एक सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह सम्मेलन किस वर्ष किया गया था –

(स) 1734 Explanation: 1734 व्याख्या : सवाई जयसिंह ने राजस्थान में बढ़ती हुई मराठा शक्ति का प्रतिरोध करने के लिए मेवाड़ के जगतसिंह द्वितीय की अध्यक्षता में 17 जुलाई, 1734 ई. को हुरड़ा सम्मेलन का आयोजन भीलवाड़ा में करवाया, किन्तु राजपूत रियासतों को एकजुट करने का यह प्रयत्न विफल हो गया।

किसी समूह की खगोलीय वेधशालाओं का निर्माण महाराजा जयसिंह जी द्वारा कराया गया –

(ब) दिल्ली, जयपुर, उज्जैन, मथुरा और बनारस Explanation: दिल्ली, जयपुर, उज्जैन, मथुरा और बनारस व्याख्या : सवाई जयसिंह ने जयपुर, दिल्ली, मथुरा, उज्जैन, और बनारस में पाँच वैद्यशालाएँ स्थापित की।

आमेर राजा बिहारीमल की पुत्री का विवाह अकबर के साथ कहां हुआ –

(स) सांभर Explanation: सांभर व्याख्या : सांभर नामक स्थान पर 6 फरवरी, 1562 ई. को भारमल ने अपनी कन्या हरकाबाई (शाहीबाई/यौद्धाबाई) का विवाह अकबर से कर दिया। भारमल पहला राजपूत शासक था जिसने मुगलों की अधीनता को स्वीकार कर उनसे वैवाहिक सम्बन्ध स्थापित किए। अकबर ने हरकाबाई को ‘मरियम उज जमानी’ की उपाधि से विभूषित किया था। इसी ने बाद में सलीम (जहांगीर) को जन्म दिया।

कौन सा प्रथम शासक था जिसने अंतरजातीय विवाह प्रारंभ करने का प्रयास किया?

(द) जय सिंह Explanation: जय सिंह व्याख्या : सवाई जयसिंह पहला राजपूत हिन्दू शासक था जिसने सती प्रथा को समाप्त करने की कोशिश की। वह पहला हिन्दू राजपूत राजा था जिसने विधवा पुनर्विवाह को वैद्यता प्रदान करने हेतु नियम बनाए तथा उन्हें लागू करने का प्रयास किया। सवाई जयसिंह पहला शासक था जिसने अन्तर्जातीय विवाह प्रारम्भ करने का प्रयास किया।

1665 की पुरंदर की संधि किनके बीच हुई थी?

(ब) शिवाजी और जयसिंह I Explanation: शिवाजी और जयसिंह I व्याख्या : 1665 में पुरंदर की संधि जय सिंह प्रथम और छत्रपति शिवाजी महाराज के बीच हुई थी। इस संधि पर 11 जून 1665 को हस्ताक्षर किए गए थे। राजा जय सिंह ने मुगल सम्राट औरंगजेब की तरफ से इस संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे।

सवाई जयसिंह ने वस्त्र उद्योग से संबंधित निम्न में से कितने कारखाने स्थापित किए –

(अ) 36 Explanation: 36 व्याख्या : सवाई जयसिंह ने वस्त्र उद्योग को बढ़ावा देने के लिए 36 कारखाने स्थापित किए थे। जयसिंह द्वारा स्थापित 36 कारखानों में कपड़द्वारा भी है। कपड़द्वारा में जयगरखाना, किरकिराखाना, तोशाखाना और खजाना बेहला आते थे। कीमती चीजें जैसे, सोना, चांदी, कसीदाकारी, तारकशी, सलमा-सितारा, गोटा, जरगर खाने का हिस्सा होते थे। किरकिराखाना में जवाहरात, रेशमी और सोने चांदी के काम के कपड़े थे। पोशाक जहां होते थे वह तोपाखाना कहलाता था। खजाना बेहला में वह कोष होता था जिसका राजा जरूरत पड़ने पर अपनी मर्जी से खर्च कर सकता था।

अकबर ने किस जयपुर नरेश को ‘फर्जद’ की उपाधि प्रदान की – (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)

(स) राजा मानसिंह Explanation: राजा मानसिंह व्याख्या : भगवान दास की मृत्यु के बाद अकबर ने इसके पुत्र मानसिंह को मिर्जाराजा और फर्जन्द (पुत्र) की उपाधियों से विभूषित कर आमेर का शासक घोषित कर दिया। मान सिंह अकबर के नौ रत्नों में से एक थे।

प्राचीन वैदिक यज्ञ, अश्वमेध यज्ञ करने वाला अंतिम हिन्दू शासक कौन था – (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)

(अ) सवाई जयसिंह Explanation: सवाई जयसिंह व्याख्या : बिशन सिंह के उपरान्त मात्र 12 वर्ष की अवस्था में जयसिंह द्वितीय शासक बना। इसका मूल नाम विजयसिंह था और उसके छोटे भाई का नाम जयसिंह था। औरंगजेब ने दोनों भाईयों के नाम परस्पर परिवर्तित करके उसे सवाई की उपाधि से विभूषित किया और वह सवाई जयसिंह के नाम से विख्यात हो गया। सवाई जयसिंह अंतिम हिन्दू शासक थे जिन्होंने अश्वमेध यज्ञ किया था। सवाई जयसिंह ने हुरड़ा सम्मेलन (1734 ई.) के एक माह बाद ही प्रथम अश्वमेध यज्ञ किया था। यज्ञ अगस्त, 1734 ई. को संपूर्ण हो गया। 1742 ई. में दूसरा अश्वमेध अधिक बड़े पैमाने पर किया गया।

फर्रुखसियर ने 1713 ई. में सवाई जयसिंह को कहाँ का सूबेदार नियुक्त किया था –

(ब) मालवा Explanation: मालवा व्याख्या : फर्रूखसियर ने बादशाह बनते ही सवाई जयसिंह को सात हजार का मनसब प्रदान कर मालवा का सूबेदार नियुक्त किया। फर्रुखसियर ने 1716 ई. में सवाई जयसिंह को भरतपुर के जाट राजा चूड़ामन के विरूद्ध सैन्य अभियान पर भेजा। जिसमें सवाई जयसिंह को सफलता नहीं मिली और सैयद मुजफ्फर खां ने चूड़ामन को मुगल अधिनता स्वीकार करने के लिए मना लिया।

कछवाहा वंश की उत्पत्ति के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है –

(स) कछवाहा वंश के वंशजों ने पहले अयोध्या, फिर मुकुटपुर और बाद में साकेत व रोहिताश पर शासन किया। Explanation: कछवाहा वंश के वंशजों ने पहले अयोध्या, फिर मुकुटपुर और बाद में साकेत व रोहिताश पर शासन किया। व्याख्या : कछवाहा वंश को भगवान राम के पुत्र कुश का वंशज माना जाता है (न कि लव का), और उनके वंशजों ने अयोध्या से शुरू होकर मुकुटपुर, साकेत और रोहिताश पर शासन किया। ढोला-मारू की कथा साल्हकुमार (नल के पुत्र) और मरवण से संबंधित है, न कि स्वयं नल से।

दुल्हराय (तेजकरण) के शासनकाल के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है –

(द) दुल्हराय ने आमेर को अपनी राजधानी बनाया, जिसके कारण कछवाहा वंश आमेर के कछवाह वंश नाम से प्रसिद्ध हुआ। Explanation: दुल्हराय ने आमेर को अपनी राजधानी बनाया, जिसके कारण कछवाहा वंश आमेर के कछवाह वंश नाम से प्रसिद्ध हुआ। व्याख्या : आमेर को दुल्हराय के पुत्र कोकिल देव ने 1207 ई. में विजित कर राजधानी बनाया, न कि दुल्हराय ने। अन्य सभी कथन दुल्हराय के कार्यों से संबंधित सही हैं।

पृथ्वीराज कछवाहा के शासनकाल के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सी बात सही नहीं है –

(द) पृथ्वीराज ने अपने ज्येष्ठ पुत्र भीमदेव को उत्तराधिकारी घोषित किया, जिसके कारण पूर्णमल ने विद्रोह किया। Explanation: पृथ्वीराज ने अपने ज्येष्ठ पुत्र भीमदेव को उत्तराधिकारी घोषित किया, जिसके कारण पूर्णमल ने विद्रोह किया। व्याख्या : पृथ्वीराज ने अपनी पत्नी बालाबाई के प्रभाव में छोटे पुत्र पूर्णमल को उत्तराधिकारी घोषित किया, जिससे क्रुद्ध होकर ज्येष्ठ पुत्र भीमदेव ने पूर्णमल को हराकर शासन हथिया लिया।

भारमल (बिहारीमल) के शासनकाल के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा तथ्य सही है –

(ब) भारमल ने 1562 ई. में अकबर की अधीनता स्वीकार की और अपनी पुत्री हरकाबाई का विवाह अकबर से करवाया। Explanation: भारमल ने 1562 ई. में अकबर की अधीनता स्वीकार की और अपनी पुत्री हरकाबाई का विवाह अकबर से करवाया। व्याख्या : भारमल ने 1562 ई. में सांभर में अकबर से अपनी पुत्री हरकाबाई (मरियम उज जमानी) का विवाह करवाया और अधीनता स्वीकार की। अन्य विकल्प तथ्यात्मक रूप से गलत हैं—भारमल ने आसकरण को पदच्युत किया, न कि उसे शासक बनाया; और मजनूं खां ने अकबर से मुलाकात में सहायता की, न कि मिर्जा को हराने में।

कछवाहा वंश के शासकों के योगदान के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है –

(स) भगवानदास ने दीन-ए-इलाही को स्वीकार किया और अकबर के नौ रत्नों में से एक बने। Explanation: भगवानदास ने दीन-ए-इलाही को स्वीकार किया और अकबर के नौ रत्नों में से एक बने। व्याख्या : भगवानदास ने दीन-ए-इलाही को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था, और अकबर के नौ रत्नों में मानसिंह शामिल थे, न कि भगवानदास। रत्नसिंह ने अफगान शासक शेरशाह सूरी (1544 ई.) की अधीनता को स्वीकार कर लिया। वह राजस्थान का पहला शासक था जिसने अफगानों की अधीनता को स्वीकार किया।

कॉलम I में कच्छवाहा राजवंश के राजा का मिलान कॉलम II में अवधि के साथ करें। कॉलम I (कच्छवाहा वंश के राजा) कॉलम II (अवधि) 1. भगवानदास a. 1589-1614 2. मानसिंह b. 1700-1743 3. मिर्जा राजा जयसिंह c. 1621-1667 4. सवाई जयसिंह d. 1573-1589 निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें:

(अ) 1-d, 2-a, 3-c, 4-b Explanation: 1-d, 2-a, 3-c, 4-b व्याख्या : भगवानदास: 1573-1589 मानसिंह: 1589-1614 मिर्जा राजा जयसिंह: 1621-1667 सवाई जयसिंह: 1700-1743

नवम्बर, 1727 ई. को जयपुर शहर की नींव किसने रखी –

(स) पण्डित जगन्नाथ सम्राट Explanation: पण्डित जगन्नाथ सम्राट व्याख्या : सवाई जयसिंह ने 18 नवम्बर, 1727 ई. जयपुर नगर की नींव रखी और उसे अपनी नवीन राजधानी (पहली दौसा, दूसरी जमवारामगढ़, तीसरी आमेर) बनाया। इसका वास्तुकार विद्याधर भट्टाचार्य था। नींव पंडित जगन्नाथ सम्राट द्वारा रखी गयी और इसकी जानकारी बख्तराम द्वारा रचित ग्रंथ बुद्धि विलास में मिलती है।

मुगल अधीनता स्वीकार करने वाला प्रथम राजपूत शासक कौन था –

(ब) भारमल Explanation: भारमल व्याख्या : सांभर नामक स्थान पर 6 फरवरी, 1562 ई. को भारमल ने अपनी कन्या हरकाबाई (शाहीबाई/यौद्धाबाई) का विवाह अकबर से कर दिया। भारमल पहला राजपूत शासक था जिसने मुगलों की अधीनता को स्वीकार कर उनसे वैवाहिक सम्बन्ध स्थापित किए। अकबर ने हरकाबाई को ‘मरियम उज जमानी’ की उपाधि से विभूषित किया था। इसी ने बाद में सलीम (जहांगीर) को जन्म दिया।

आमेर के किस शासक को तीन मुगल सम्राटों जहांगीर, शाहजहाँ और औरंगज़ेब की सेवा में रहने का अवसर प्राप्त हुआ –

(ब) मिर्जा राजा जयसिंह Explanation: मिर्जा राजा जयसिंह व्याख्या : भावसिंह के कोई पुत्र नहीं था। जयसिंह-प्रथम, मानसिंह प्रथम के पुत्र जगतसिंह के पुत्र महासिंह के पुत्र थे। भावसिंह के उपरान्त जयसिंह-प्रथम शासक बना। जयसिंह प्रथम ने तीन मुगल सम्राटों जहाँगीर (1605-1627 ई.), शाहजहाँ (1628-1658 ई.) और औरंगजेब (1658-1707 ई.) की सेवा की।

बिहार के सूबेदार के रूप में राजा मान सिंह ने अपना प्रथम अभियान बिहार के किस शासक के विरुद्ध किया –

(ब) गिद्धौर के राजा पूरनमल Explanation: गिद्धौर के राजा पूरनमल व्याख्या : काबुल से मानसिंह का स्थानान्तरण बिहार कर दिया गया, क्योंकि वहां स्थानीय जमींदारों के उपद्रव हो रहे थे और कई छोटे-छोटे राजा मुगल सत्ता की अवहेलना कर मनमानी करते थे। मानसिंह 1587 से 1594 ई. तक बिहार के सुबेदार था। 1589 ई. में भगवान दास की मृत्यु के कारण मानसिंह का राज्याभिषेक पटना (बिहार) में हुआ था। वह आमेर पहुँचा और वहाँ औपचारिक रूप से उसकी गद्दीनशीना हुई। अकबर ने भी उसके लिए टीका भेजकर और उसके 5000 के मनसब को पक्का कर सम्मानित किया। इसके बाद सबसे पहले उसने गिधोर (बिहार) के राजा पूर्णमल को परास्त कर उसे मुगल अधीनता स्वीकार करने को बाध्य किया।

शासक भारमल राजस्थान के किस राजवंश से संबंध रखता था –

(द) कछवाहा राजवंश Explanation: कछवाहा राजवंश व्याख्या : महाराजा भारमल (1547-1574) कछवाहा राजवंश के शासक थे और आमेर (जयपुर) के राजा थे। भारमल पृथ्वीराज के सबसे छोटे पुत्र थे। सांभर नामक स्थान पर 6 फरवरी, 1562 ई. को भारमल ने अपनी कन्या हरकाबाई (शाहीबाई/यौद्धाबाई) का विवाह अकबर से कर दिया। भारमल पहला राजपूत शासक था जिसने मुगलों की अधीनता को स्वीकार कर उनसे वैवाहिक सम्बन्ध स्थापित किए। अकबर ने हरकाबाई को ‘मरियम उज जमानी’ की उपाधि से विभूषित किया था। इसी ने बाद में सलीम (जहांगीर) को जन्म दिया।

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