Antriksh Anusndhan Free Mock Test – Part 7

Antriksh Anusndhan Free Mock Test – Part 7

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Antriksh Anusndhan Free Mock Test – Part 7

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सीएमएस-03 संचार उपग्रह के लिए निम्नलिखित कथनों पर विचार करें और सही विकल्प चुनें : कथन A : सीएमएस-03 को एलवीएम3 की चौथी परिचालन उड़ान द्वारा 20 नवंबर, 2025 को प्रक्षेपित किया गया था। कथन B : सीएमएस-03 एक बहु-बैंड संचार उपग्रह है जो भारतीय भू-भाग सहित एक विस्तृत समुद्री क्षेत्र में सेवाएँ प्रदान करता है।

(द) कथन B सत्य है, लेकिन कथन A असत्य है। Explanation: कथन B सत्य है, लेकिन कथन A असत्य है। व्याख्या : ISRO ने 2 नवंबर 2025 को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से LVM3-M5 रॉकेट के माध्यम से CMS-03 लॉन्च किया। CMS-03 भारत का अब तक का सबसे भारी संचार उपग्रह है, जिसका वजन लगभग 4,410 किलोग्राम है। यह पहला अवसर है जब भारत ने इतने बड़े वजन का संचार उपग्रह अपने ही रॉकेट (LVM3-M5) से भूस्थिर स्थानांतरण कक्षा (GTO) में भेजा। CMS-03 बहु-बैंड संचार उपग्रह है, जो भारत और आसपास के महासागरीय क्षेत्रों में सेवा प्रदान करेगा।

नासा के मेवेन (MAVEN) मिशन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसे वर्ष 2013 में प्रक्षेपित किया गया था। 2. इसका उद्देश्य मंगल ग्रह के वायुमंडल का अध्ययन करना था। 3. नासा ने घोषणा की है कि यान को दोबारा सक्रिय किया जा सकता है। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

(अ) केवल 1 और 2 Explanation: केवल 1 और 2 व्याख्या : नासा ने मंगल ग्रह की परिक्रमा कर रहे अपने मेवेन अंतरिक्ष यान के मिशन के समाप्त होने की घोषणा की है। लगभग छह महीने तक कोई संपर्क नहीं होने के बाद नासा ने पुष्टि की कि एक दशक से अधिक समय तक चले इस मिशन का अंत हो गया है। वर्ष 2013 में प्रक्षेपित मेवेन का उद्देश्य मंगल ग्रह के वायुमंडल का अध्ययन करना था। पिछले वर्ष दिसंबर में मंगल ग्रह के पीछे जाने के बाद यान से संपर्क टूट गया था।

‘तृष्णा (TRISHNA)’ उपग्रह मिशन के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह इसरो और फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी CNES का संयुक्त मिशन है। 2. इसका उद्देश्य जल एवं खाद्य सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से निपटना है। 3. यह मिशन पृथ्वी की सतह के तापमान एवं जल उपयोग की निगरानी करेगा। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

(द) 1, 2 और 3 Explanation: 1, 2 और 3 व्याख्या : त्रिष्णा (Thermal Infra-Red Imaging Satellite for High-resolution Natural Resource Assessment) मिशन, इसरो और फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी (सीएनईएस) के बीच एक सहयोगात्मक प्रयास है, जो क्षेत्रीय से वैश्विक स्तर पर सतही ऊर्जा बजट के लिए पृथ्वी के सतही तापमान, उत्पादकता, जैवभौतिक और विकिरण चरों की उच्च स्थानिक और उच्च कालिक विभेदन निगरानी प्रदान करने के लिए इंजीनिकट है।

‘विक्रम-1’ मिशन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए— 1. विक्रम-1 भारत का पहला निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट है। 2. इसे स्काईरूट एयरोस्पेस ने विकसित किया है। 3. भारत इस सफलता के साथ निजी क्षेत्र में ऑर्बिटल लॉन्च क्षमता हासिल करने वाला विश्व का तीसरा देश बन गया। 4. इसने पेलोड को लगभग 600 किमी ऊंची कक्षा में स्थापित किया। उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

(ब) केवल 1, 2 और 3 Explanation: केवल 1, 2 और 3 व्याख्या : भारत के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट ‘विक्रम-1’ ने ‘मिशन आगमन’ के तहत शनिवार को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सफलतापूर्वक उड़ान भरते हुए अपनी निर्धारित कक्षा (ऑर्बिट) हासिल कर ली। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ भारत निजी क्षेत्र में ऑर्बिटल लॉन्च क्षमता हासिल करने वाला दुनिया का तीसरा देश बन गया है। हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा विकसित इस रॉकेट ने अपने सभी मिशन चरण सफलतापूर्वक पूरे करते हुए पेलोड्स को पृथ्वी से लगभग 450 किलोमीटर ऊंची कक्षा में स्थापित किया। विक्रम-1 स्काईरूट का दूसरा स्पेस मिशन है। इससे पहले 2022 में स्काईरूट विक्रम-S सबऑर्बिटल की भी सफल टेस्टिंग कर चुका है। विक्रम-S भारतीय जमीन से अंतरिक्ष तक पहुंचने वाला पहला प्राइवेट तौर पर बनाया गया रॉकेट था।

विक्रम-1 रॉकेट के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए— 1. इसमें तीन सॉलिड-फ्यूल चरण हैं। 2. अंतिम ऑर्बिटल समायोजन के लिए 3डी-प्रिंटेड लिक्विड इंजन ‘रमन इंजन’ का उपयोग किया गया। 3. इसे 350 किलोग्राम तक के पेलोड को 450 किमी ऊंची लो अर्थ ऑर्बिट में स्थापित करने के लिए विकसित किया गया। 4. पहला चरण ‘कलाम-250’ कहलाता है। सही उत्तर चुनिए—

(अ) केवल 1, 2 और 3 Explanation: केवल 1, 2 और 3 व्याख्या : लॉन्च के बाद ‘विक्रम-1’ ने लॉन्च टॉवर से सुरक्षित दूरी बनाई। इसके बाद पहला सॉलिड-फ्यूल चरण ‘कलाम-1200’ सफलतापूर्वक अलग हुआ और रॉकेट को वायुमंडल के घने हिस्से से बाहर ले गया। इसके बाद पेलोड फेयरिंग अलग हुई, जिससे उपग्रह पहली बार अंतरिक्ष के खुले वातावरण में पहुंचे। दूसरे चरण ‘कलाम-250’ ने अपना बर्न पूरा कर अलगाव किया, जबकि तीसरे चरण ‘कलाम-100’ ने रॉकेट को अंतिम वेग प्रदान किया। इसके बाद लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल ‘रमन इंजन’ ने पेलोड्स को 450 किलोमीटर ऊंची लो अर्थ ऑर्बिट (एलईओ) में स्थापित किया। विक्रम-1 को 350 किलोग्राम तक के पेलोड को 60 डिग्री झुकाव वाली 450 किलोमीटर ऊंची लो अर्थ ऑर्बिट में स्थापित करने के लिए विकसित किया गया है। इसमें तीन सॉलिड-फ्यूल चरण और एक 3डी-प्रिंटेड लिक्विड इंजन से लैस ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल लगाया गया है।

विक्रम-1 मिशन के पेलोड के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित है? पेलोड – उद्देश्य 1. इमब्रेस – अंतरिक्ष मलबा (Space Debris) पकड़ने हेतु रोबोटिक आर्म | 2. स्कोप – स्काईरूट का उपग्रह | 3. सोलर्स S-3 – ग्रह स्पेस का उपग्रह |

(स) 1, 2 और 3 Explanation: 1, 2 और 3 व्याख्या : अपने पहले मिशन में ‘विक्रम-1’ ने कई ग्राहक पेलोड्स को कक्षा में स्थापित किया। इनमें स्काईरूट का ‘स्कोप’ सैटेलाइट, डीक्यूब्ड का टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन पेलोड, ग्रह स्पेस का ‘सोलर्स एस-3’ सैटेलाइट और कॉस्मोसर्व स्पेस का ‘इमब्रेस’ रोबोटिक आर्म शामिल हैं। ‘इमब्रेस’ को अंतरिक्ष में मौजूद मलबे (स्पेस डेब्रिस) को पकड़ने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। मिशन के साथ ‘कॉस्मिक ब्लूम’ नामक फूलों के आकार की कलाकृति भी अंतरिक्ष में भेजी गई। इसके अलावा 18 कैरेट सोने से बना एक माइक्रो-रॉकेट भी पेलोड का हिस्सा रहा, जिस पर नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक सी.वी. रमन, भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई और पूर्व राष्ट्रपति एवं वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की सूक्ष्म प्रतिमाएं अंकित हैं।

ईओएस-05 (EOS-05) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए— 1. इसका प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा से जीएसएलवी-F17 रॉकेट द्वारा किया गया। 2. इसे जियोसिंक्रोनस कक्षा में स्थापित किया गया। 3. इससे प्राप्त वास्तविक समय की तस्वीरें कृषि और आपदा प्रबंधन में उपयोगी होंगी। सही उत्तर है—

(द) 1, 2 और 3 Explanation: 1, 2 और 3 व्याख्या : भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और बड़ी सफलता हासिल की है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने श्रीहरिकोटा से जी.एस.एल.वी- एफ17 रॉकेट के जरिए पृथ्वी अवलोकन उपग्रह ई.ओ.एस-05 का सफल प्रक्षेपण किया। इसरो के अनुसार, प्रक्षेपण के करीब 18 मिनट बाद भारत के पहले इमेजिंग उपग्रह को जियोसिंक्रोनस कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया। ई.ओ.एस-05 से वास्तविक समय में तस्वीरें मिलेंगी। इससे कृषि और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में मदद मिलेगी।

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