1. राणा क्षेत्रसिंह / महाराणा खेता (1364–1382 ई.)
राणा हम्मीर की मृत्यु के पश्चात उनके पुत्र राणा क्षेत्रसिंह (जिन्हें ‘महाराणा खेता’ भी कहा जाता है) मेवाड़ की गद्दी पर आसीन हुए।
1.1 राणा क्षेत्रसिंह की प्रमुख उपलब्धियाँ
(i) राज्य विस्तार
राणा क्षेत्रसिंह ने अपने शासनकाल में अजमेर, जहाजपुर, माण्डल और छप्पन के क्षेत्रों को मेवाड़ राज्य में सम्मिलित किया। यह उनके साम्राज्यवादी दृष्टिकोण को प्रमाणित करता है।
(ii) मालवा के दिलावर खां गोरी को पराजित करना
- राणा क्षेत्रसिंह ने मालवा के दिलावर खां गोरी को परास्त किया।
- इस विजय ने भविष्य में होने वाले मालवा-मेवाड़ संघर्ष का सूत्रपात किया — यह एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक बिंदु है।
(iii) मृत्यु — बूंदी के लालसिंह हाड़ा से युद्ध
- 1382 ई. में बूंदी (हाड़ौती) के लालसिंह हाड़ा से युद्ध करते हुए राणा क्षेत्रसिंह की मृत्यु हुई।
- इस युद्ध में लालसिंह हाड़ा भी वीरगति को प्राप्त हुए — दोनों पक्ष के शासकों का एक साथ मारा जाना एक अपूर्व घटना थी।
1.2 खातिन दासी और उनके पुत्र — महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु
| विवरण | तथ्य |
|---|---|
| दासी की जाति | खातिन (बढ़ई जाति) |
| दासी के पुत्र | चाचा और मेरा |
| ऐतिहासिक महत्व | इन्हीं चाचा-मेरा ने आगे चलकर महाराणा मोकल की हत्या की |
💡 परीक्षा ट्रिक: “क्षेत्रसिंह की दासी (खातिन) → चाचा + मेरा → मोकल के हत्यारे” — यह chain याद रखें।
1.3 राणा क्षेत्रसिंह — त्वरित तथ्य सारणी
| विवरण | तथ्य |
|---|---|
| शासनकाल | 1364–1382 ई. |
| पिता | राणा हम्मीर |
| उपनाम | महाराणा खेता |
| राज्य विस्तार | अजमेर, जहाजपुर, माण्डल, छप्पन |
| विजय | मालवा के दिलावर खां गोरी |
| मृत्यु | बूंदी के लालसिंह हाड़ा से युद्ध में (1382 ई.) |
| उत्तराधिकारी | पुत्र राणा लाखा |
| खातिन दासी के पुत्र | चाचा और मेरा (मोकल के भावी हत्यारे) |
👑 2. राणा लाखा / राणा लक्षसिंह (1382–1421 ई.)
राणा लाखा का शासनकाल मेवाड़ के इतिहास में आर्थिक समृद्धि, साहित्य और एक अभूतपूर्व त्याग के लिए जाना जाता है। इनके शासनकाल की राजकुमार चूँडा की प्रतिज्ञा आज भी राजपूताने की सबसे प्रेरणादायक कहानियों में से एक है।
2.1 राणा लाखा की प्रमुख उपलब्धियाँ
(i) बदनौर प्रदेश पर अधिकार
- राणा लाखा ने बदनौर प्रदेश को मेवाड़ राज्य में सम्मिलित किया।
(ii) दरबारी विद्वान
- झोटिंग भट्ट और धनेश्वर भट्ट — दोनों संस्कृत साहित्य के प्रसिद्ध विद्वान — राणा लाखा के दरबारी थे।
💡 परीक्षा बिंदु: “झोटिंग भट्ट और धनेश्वर भट्ट” = राणा लाखा के दरबारी — यह Match-the-Column में पूछा जाता है।
(iii) जावर की खदानें — आर्थिक समृद्धि
- राणा लाखा के शासनकाल में जावर की खदानों से चांदी और सीसा अत्यधिक मात्रा में निकलने लगा।
- इससे मेवाड़ राज्य की आर्थिक समृद्धि में भारी वृद्धि हुई।
- जावर की खदानें उस समय एशिया में प्रसिद्ध थीं।
💡 परीक्षा बिंदु: “जावर की खदानें → चांदी + सीसा → राणा लाखा के काल में”।
(iv) पिछोला झील का निर्माण — महत्वपूर्ण
| विवरण | तथ्य |
|---|---|
| झील का नाम | पिछोला झील (उदयपुर) |
| निर्माणकर्ता | पिच्छू नामक एक बंजारे ने बनवाई |
| काल | राणा लाखा के शासनकाल में |
| वर्तमान महत्व | उदयपुर की सबसे प्रसिद्ध झील — ‘झीलों की नगरी’ की पहचान |
🔑 परीक्षा बिंदु: “पिछोला झील किसने बनवाई?” — पिच्छू नामक बंजारे ने, राणा लाखा के काल में। यह अत्यंत लोकप्रिय प्रश्न है।
2.2 राजकुमार चूँडा का महान त्याग — मेवाड़ का भीष्म पितामह
यह राजस्थान के इतिहास की सबसे प्रेरणादायक और परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण घटना है। इसे विस्तार से समझें:
2.2.1 घटनाक्रम की शुरुआत
एक दिन महाराणा लाखा के दरबार में मारवाड़ के राठौड़ रणमल की बहन हंसाबाई के विवाह का प्रस्ताव (नारियल) आया। प्रस्ताव था — राणा के पुत्र कुँवर चूँडा के लिए।
उस समय चूँडा दरबार में अनुपस्थित थे। महाराणा ने परिहास में कह दिया:
“अब हम जैसे बूढ़ों के लिए नारियल कौन लाएगा?”
2.2.2 रणमल की शर्त
यह बात सुनकर रणमल ने संदेश भिजवाया:
“यदि हंसाबाई से उत्पन्न होने वाला पुत्र ही मेवाड़ की गद्दी का उत्तराधिकारी स्वीकार किया जाए, तो हम अपनी बहन का विवाह लाखा से करने को तैयार हैं।”
महाराणा असमंजस में पड़ गए — चूँडा उनके ज्येष्ठ पुत्र थे, अतः ऐसा करना अनुचित था।
2.2.3 चूँडा की अटल प्रतिज्ञा — इतिहास की सबसे बड़ी कुर्बानी
जब स्वाभिमानी राजकुमार चूँडा को यह स्थिति ज्ञात हुई, तो उन्होंने स्वयं आगे आकर एक ऐतिहासिक प्रतिज्ञा ली:
“मेवाड़ के सिंहासन पर न मेरा और न मेरे उत्तराधिकारियों का कोई अधिकार होगा। राजकुमारी हंसाबाई से उत्पन्न होने वाली संतान का ही अधिकार होगा।”
और रणमल को संदेश भिजवाया कि वह राज्य का अधिकार त्यागने के लिए तैयार हैं।
2.2.4 परिणाम
महाराणा लाखा + हंसाबाई (राठौड़) → विवाह
↓
पुत्र: मोकल (मेवाड़ के अगले महाराणा)
↓
चूँडा = राज्य के उत्तराधिकार का त्याग
↓
लाखा ने चूँडा को बनाया: मोकल का संरक्षक
↓
नियम: मेवाड़ के सभी पट्टों पर चूँडा और वंशजों का भाले का निशान
🏆 परिणाम: इसी अभूतपूर्व त्याग के कारण राजस्थान के इतिहास में राजकुमार चूँडा को ‘मेवाड़ का भीष्म पितामह’ कहा जाता है।
2.2.5 चूँडा के त्याग के बाद की विशेष परम्परा
| परम्परा | विवरण |
|---|---|
| संरक्षक | लाखा ने चूँडा को मोकल का संरक्षक नियुक्त किया |
| भाले का निशान | भविष्य में मेवाड़ के सभी पट्टों, परवानों और सनदों पर चूँडा और उनके वंशजों के भाले का निशान अंकित करने का नियम बनाया |
| ऐतिहासिक उपाधि | राजकुमार चूँडा = ‘मेवाड़ का भीष्म पितामह’ |
2.3 राणा लाखा — त्वरित तथ्य सारणी
| विवरण | तथ्य |
|---|---|
| शासनकाल | 1382–1421 ई. |
| पिता | राणा क्षेत्रसिंह |
| राज्य विस्तार | बदनौर प्रदेश |
| दरबारी विद्वान | झोटिंग भट्ट + धनेश्वर भट्ट |
| आर्थिक उपलब्धि | जावर की खदानें (चांदी + सीसा) |
| झील निर्माण | पिछोला झील (पिच्छू बंजारे ने बनवाई) |
| दूसरी पत्नी | हंसाबाई (मारवाड़ के राठौड़ रणमल की बहन) |
| हंसाबाई से पुत्र | मोकल (मेवाड़ का अगला महाराणा) |
| ज्येष्ठ पुत्र | चूँडा = ‘मेवाड़ का भीष्म पितामह’ |
| उत्तराधिकारी | राणा मोकल (हंसाबाई से उत्पन्न) |
👑 3. राणा मोकल (1421–1433 ई.)
3.1 प्रारम्भिक शासन — चूँडा का संरक्षण
महाराणा लाखा के देहावसान के समय मोकल की आयु लगभग 12 वर्ष थी। इस कारण राज्य का समस्त कार्यभार राजकुमार चूँडा ने कुशलता से संभाला।
3.2 रणमल राठौड़ का षड्यंत्र और चूँडा का माण्डू प्रस्थान
| घटना | विवरण |
|---|---|
| षड्यंत्रकारी | रणमल राठौड़ (हंसाबाई का भाई, मोकल का मामा) |
| चाल | हंसाबाई को चूँडा के विरुद्ध भड़काया → हंसाबाई को चूँडा पर संदेह हुआ |
| चूँडा का निर्णय | स्वाभिमानी चूँडा ने माण्डू के सुल्तान होशंगशाह के दरबार में जाने का निर्णय किया |
| छोड़ा | मेवाड़ की रक्षा के लिए अपने भाई राघवदेव को छोड़ गए |
3.3 रणमल राठौड़ का मेवाड़ पर प्रभुत्व
चूँडा के जाने के बाद हंसाबाई ने मारवाड़ से रणमल को बुला लिया:
रणमल मेवाड़ में आया
↓
संपूर्ण राजकार्य अपने हाथ में लिया
↓
सिसोदिया सरदारों को हटाया → राठौड़ सरदार नियुक्त किए
↓
राघवदेव की हत्या (मेवाड़ का योग्य सरदार)
↓
सिसोदिया सरदार अत्यंत नाराज
3.4 रणमल राठौड़ का मारवाड़ पर शासन
| घटना | वर्ष | विवरण |
|---|---|---|
| राव चूड़ा का निर्णय | 1423 ई. | रणमल को शासक न बनाकर छोटे पुत्र राव कान्हा को उत्तराधिकारी बनाया |
| राव कान्हा की मृत्यु | 1427 ई. | — |
| रणमल की मारवाड़ विजय | 1427 ई. | मेवाड़ की सेना की सहायता से मंडोर पर अधिकार → मारवाड़ का शासक बना |
💡 परीक्षा बिंदु: रणमल ने मेवाड़ की सेना की मदद से मंडोर पर अधिकार किया।
3.5 रामपुरा का युद्ध (1428 ई.) — महत्वपूर्ण
| विवरण | तथ्य |
|---|---|
| युद्ध | रामपुरा का युद्ध |
| वर्ष | 1428 ई. |
| दोनों पक्ष | महाराणा मोकल बनाम नागौर के फिरोज खां |
| फिरोज खां की सहायता | गुजरात की सेना (अहमद शाह के अधीन) |
| परिणाम | महाराणा मोकल विजयी — फिरोज खां और गुजरात दोनों पराजित |
🔑 परीक्षा बिंदु: रामपुरा युद्ध में गुजरात का अहमद शाह भी था — दोनों को हराया।
3.6 मोकल के निर्माण कार्य
(i) समिधेश्वर मंदिर का जीर्णोद्धार (1428 ई.)
| विवरण | तथ्य |
|---|---|
| मंदिर | समिधेश्वर मंदिर (चित्तौड़गढ़ दुर्ग में) |
| मूल निर्माणकर्ता | परमार वंशीय राजा भोज |
| जीर्णोद्धार | महाराणा मोकल ने 1428 ई. में करवाया |
| अन्य नाम | मोकल द्वारा जीर्णोद्धार के कारण → ‘मोकल मंदिर’ भी कहते हैं |
(ii) एकलिंग मंदिर परकोटे का जीर्णोद्धार
- महाराणा मोकल ने चित्तौड़गढ़ दुर्ग में स्थित एकलिंग मंदिर के परकोटे का भी जीर्णोद्धार करवाया।
(iii) दरबारी प्रतिभाएं
| श्रेणी | नाम |
|---|---|
| कुशल शिल्पी | मना, फना और विसल |
| दरबारी विद्वान | योगेश्वर और भट्ट विष्णु |
💡 परीक्षा बिंदु: “मना, फना, विसल” = मोकल के दरबारी शिल्पी।
3.7 महाराणा मोकल की हत्या (1433 ई.) — परीक्षा का महत्वपूर्ण विषय
हत्या की पृष्ठभूमि
1433 ई. में गुजरात का सुल्तान अहमद शाह मेवाड़ पर आक्रमण करने रवाना हुआ। महाराणा मोकल जीलवाड़ा नामक स्थान पर इसे रोकने गए।
हत्या का कारण — परिहास से उपजा प्रतिशोध
| घटना | विवरण |
|---|---|
| परिहास | एक बार जंगल में महाराणा मोकल ने चाचा और मेरा से किसी वृक्ष का नाम पूछ लिया |
| अपमान का भाव | चाचा-मेरा ने इसे अपमान समझा — क्योंकि उनकी माँ खातिन (बढ़ई) जाति की थी |
| षड्यंत्र | महपा पंवार के उकसाने पर चाचा-मेरा ने हत्या की योजना बनाई |
| हत्या | जीलवाड़ा में अवसर पाकर चाचा और मेरा ने मोकल की हत्या कर दी |
⚠️ याद रखें: मोकल के हत्यारे = चाचा + मेरा + महपा पंवार (तीनों मिलकर)। इनमें महपा पंवार उकसाने वाला था।
हत्याकांड के बाद
| घटना | विवरण |
|---|---|
| मुख्य षड्यंत्रकारी | चाचा, मेरा और महपा पंवार |
| भागे कहाँ | माण्डू के सुल्तान की शरण में |
| अगला शासक | राणा मोकल के पुत्र — राणा कुंभा |
3.8 राणा मोकल — त्वरित तथ्य सारणी
| विवरण | तथ्य |
|---|---|
| शासनकाल | 1421–1433 ई. |
| पिता | राणा लाखा |
| माता | हंसाबाई (राठौड़) |
| गद्दी पर आसीन होते समय उम्र | ~12 वर्ष |
| प्रारम्भिक संरक्षक | राजकुमार चूँडा |
| रामपुरा युद्ध | 1428 — फिरोज खां + गुजरात पराजित |
| मंदिर जीर्णोद्धार | समिधेश्वर (मोकल मंदिर) + एकलिंग परकोटा |
| शिल्पी | मना, फना, विसल |
| विद्वान | योगेश्वर, भट्ट विष्णु |
| हत्या | 1433 ई. — जीलवाड़ा में |
| हत्यारे | चाचा + मेरा (महपा पंवार के उकसावे पर) |
| उत्तराधिकारी | पुत्र राणा कुंभा |
📊 Part 3 — रणमल राठौड़ की भूमिका:
रणमल राठौड़ इस पूरे काल का केंद्रीय पात्र है। उसकी भूमिका को समझना परीक्षा के लिए आवश्यक है:
रणमल राठौड़
│
├── हंसाबाई का भाई (लाखा की पत्नी का भाई = मोकल का मामा)
│
├── चूँडा को हटाया (हंसाबाई को भड़काकर)
│
├── मेवाड़ की राजनीति में हस्तक्षेप
│ └── सिसोदिया सरदार हटाए → राठौड़ नियुक्त किए
│
├── राघवदेव (चूँडा का भाई) की हत्या करवाई
│
├── मेवाड़ सेना से मंडोर जीता (1427) → मारवाड़ शासक बना
│
└── [Part 4 में] राणा कुंभा द्वारा 1438 में हत्या
📊 Part 3 की समग्र Timeline
राणा क्षेत्रसिंह (1364-1382)
→ अजमेर, जहाजपुर, माण्डल, छप्पन विजय
→ दिलावर खां गोरी पराजित
→ 1382: बूंदी के लालसिंह से युद्ध में वीरगति
→ खातिन दासी के पुत्र: चाचा + मेरा
राणा लाखा (1382-1421)
→ जावर खदानें (चांदी + सीसा)
→ पिछोला झील (पिच्छू बंजारा)
→ दरबारी: झोटिंग भट्ट + धनेश्वर भट्ट
→ हंसाबाई से विवाह (रणमल की बहन)
→ चूँडा की प्रतिज्ञा = 'मेवाड़ का भीष्म पितामह'
→ उत्तराधिकारी: मोकल (हंसाबाई पुत्र)
राणा मोकल (1421-1433)
→ 12 वर्ष की आयु में शासक | संरक्षक: चूँडा
→ रणमल का हस्तक्षेप | चूँडा माण्डू गए
→ 1428: रामपुरा युद्ध (फिरोज खां + गुजरात पराजित)
→ समिधेश्वर (मोकल) मंदिर जीर्णोद्धार
→ शिल्पी: मना, फना, विसल
→ 1433: जीलवाड़ा में हत्या (चाचा + मेरा)
→ उत्तराधिकारी: राणा कुंभा
📝 Part 3 — विगत वर्षों के प्रश्न (PYQs)
Q1. राणा क्षेत्रसिंह का उपनाम क्या था?
- (A) राणा खेता (B) महाराणा खेता ✓ (C) राणा लाखा (D) राणा मेरा
व्याख्या: राणा क्षेत्रसिंह को ‘महाराणा खेता’ भी कहा जाता है।
Q2. पिछोला झील का निर्माण किसने करवाया था?
- (A) राणा लाखा ने (B) महाराणा उदयसिंह ने (C) पिच्छू नामक बंजारे ने ✓ (D) अलाउद्दीन खिलजी ने
व्याख्या: पिच्छू नामक बंजारे ने राणा लाखा के काल में पिछोला झील बनवाई।
Q3. ‘मेवाड़ का भीष्म पितामह’ किसे कहा जाता है?
- (A) राणा हम्मीर (B) राणा लाखा (C) राजकुमार चूँडा ✓ (D) राणा मोकल
व्याख्या: चूँडा ने मेवाड़ की गद्दी का अधिकार स्वेच्छा से त्याग दिया था।
Q4. राणा लाखा के काल में किन खदानों से प्रचुर चांदी निकलती थी?
- (A) नागौर (B) राजसमंद (C) जावर ✓ (D) भीलवाड़ा
Q5. हंसाबाई कौन थी?
- (A) राणा क्षेत्रसिंह की पुत्री
- (B) मारवाड़ के राठौड़ रणमल की बहन और राणा लाखा की पत्नी ✓
- (C) राणा मोकल की पत्नी
- (D) चूँडा की पत्नी
Q6. राणा लाखा के दरबारी विद्वान कौन थे?
- (A) मना और फना (B) योगेश्वर और भट्ट विष्णु (C) झोटिंग भट्ट और धनेश्वर भट्ट ✓ (D) गोरा और बादल
Q7. ‘रामपुरा का युद्ध’ (1428) किनके बीच हुआ?
- (A) मोकल vs अहमद शाह
- (B) मोकल vs फिरोज खां (नागौर) ✓ (साथ में गुजरात की सेना)
- (C) लाखा vs रणमल
- (D) क्षेत्रसिंह vs दिलावर खां
Q8. ‘समिधेश्वर मंदिर’ (चित्तौड़गढ़) का मूल निर्माणकर्ता कौन था?
- (A) राणा मोकल (B) परमार वंशीय राजा भोज ✓ (C) बप्पा रावल (D) राणा हम्मीर
व्याख्या: मूल निर्माण = राजा भोज; जीर्णोद्धार = राणा मोकल (इसीलिए ‘मोकल मंदिर’ भी कहते हैं)।
Q9. ‘मोकल मंदिर’ किसे कहा जाता है?
- (A) एकलिंगजी मंदिर (B) श्याम पार्श्वनाथ (C) समिधेश्वर मंदिर ✓ (D) कालिका मंदिर
Q10. महाराणा मोकल की हत्या किसने की और कहाँ की?
- (A) रणमल ने दरबार में
- (B) चाचा और मेरा ने जीलवाड़ा में (महपा पंवार के उकसावे पर) ✓
- (C) गुजरात सुल्तान ने
- (D) चूँडा ने माण्डू में
Q11. ‘चाचा और मेरा’ कौन थे?
- (A) राणा मोकल के भाई
- (B) राणा क्षेत्रसिंह की खातिन दासी के पुत्र ✓
- (C) रणमल राठौड़ के पुत्र
- (D) मेवाड़ के सामंत
Q12. चूँडा मेवाड़ छोड़कर किस सुल्तान के दरबार में गए?
- (A) दिल्ली के सुल्तान (B) गुजरात के सुल्तान (C) माण्डू के सुल्तान होशंगशाह ✓ (D) नागौर के सुल्तान
Q13. राणा क्षेत्रसिंह की मृत्यु किससे युद्ध में हुई?
- (A) अलाउद्दीन खिलजी (B) मालवा के दिलावर खां (C) बूंदी के लालसिंह हाड़ा ✓ (D) गुजरात के अहमद शाह
Q14. रणमल राठौड़ ने मेवाड़ की सेना की सहायता से किस स्थान पर अधिकार किया?
- (A) जोधपुर (B) बीकानेर (C) मंडोर ✓ (D) जालोर
Q15. मोकल के दरबारी शिल्पी कौन थे?
- (A) झोटिंग-धनेश्वर (B) मना, फना और विसल ✓ (C) गोरा-बादल (D) चाचा-मेरा
🗝️ Part 3 — स्मरणीय संकेत (Memory Tricks)
| विषय | ट्रिक |
|---|---|
| क्षेत्रसिंह = खेता | “क्षेत्र = खेत → खेता“ |
| पिछोला झील | “पिच्छू बंजारा → पिछोला” (पिच्छू = पिछोला) |
| जावर खदानें | “जावर में चाँदी, लाखा के राज में“ |
| चूँडा = भीष्म पितामह | “चूँडा ने त्यागा, भीष्म ने त्यागा“ |
| रामपुरा युद्ध | “मोकल ने 1428 में फिरोज + गुजरात दोनों तोड़े“ |
| मोकल मंदिर | “भोज ने बनाया, मोकल ने सँवारा“ |
| मोकल की हत्या | “चाचा-मेरा + महपा = जीलवाड़ा में मोकल का काम तमाम“ |
| झोटिंग-धनेश्वर | “लाखा के दरबार में झोट-धन“ |
| मना-फना-विसल | “मोकल के दरबार में मन-फन-विस = शिल्पी तीन“ |
📚 Quick Revision Box — Part 3
राणा क्षेत्रसिंह (1364-82): महाराणा खेता | अजमेर-जहाजपुर-माण्डल-छप्पन
→ दिलावर खां गोरी पराजित | लालसिंह हाड़ा से वीरगति
→ खातिन दासी पुत्र: चाचा + मेरा (मोकल के भावी हत्यारे)
राणा लाखा (1382-1421): जावर खदानें (चाँदी+सीसा)
→ पिछोला झील: पिच्छू बंजारे ने बनवाई
→ दरबारी: झोटिंग भट्ट + धनेश्वर भट्ट
→ हंसाबाई (रणमल की बहन) से विवाह → मोकल उत्पन्न
→ चूँडा = 'मेवाड़ का भीष्म पितामह' (गद्दी का त्याग)
राणा मोकल (1421-33): 12 वर्ष | संरक्षक: चूँडा
→ रणमल का हस्तक्षेप | चूँडा → माण्डू
→ 1428: रामपुरा युद्ध (फिरोज खां + गुजरात पराजित)
→ समिधेश्वर = मोकल मंदिर | शिल्पी: मना-फना-विसल
→ 1433: हत्या — जीलवाड़ा | हत्यारे: चाचा+मेरा (महपा पंवार)
→ उत्तराधिकारी: राणा कुंभा (10 वर्ष की आयु में)
















