धारा 233-235 BNS VS धारा 196-198 IPC: मिथ्या साक्ष्य को असली (Genuine) के रूप में उपयोग करना और झूठा प्रमाणपत्र (Certificate)
सजा (Punishment)
समान
संज्ञेय (Cognizable)
असंज्ञेय
जमानतीय (Bailable)
गैर-जमानती (Court matters)
समझौता योग्य (Compoundable
गैर-शमनीय
विचारणीय न्यायालय (Court)
प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
IPC (पुराना कानून)
धारा 196-198
196: उस साक्ष्य को, जिसे वह जानता है कि मिथ्या है, असली के रूप में काम में लाना। 197: झूठा प्रमाणपत्र (Certificate) जारी करना। 198: झूठे प्रमाणपत्र को असली के रूप में प्रयोग करना। (इन सबमें सजा ‘मिथ्या साक्ष्य देने’ यानी 193 के समान ही है)।
BNS (नया कानून)
धारा 233-235
233: उस साक्ष्य को, जिसे वह जानता है कि मिथ्या है, असली के रूप में काम में लाना। 234: झूठा प्रमाणपत्र (Certificate) जारी करना। 235: झूठे प्रमाणपत्र को असली के रूप में प्रयोग करना। (Penalty equal to giving false evidence).
विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)
फर्जी सर्टिफिकेट (Fake Certificate) बनाना! आज की दुनिया में कई लोग नौकरी पाने या कोर्ट में केस जीतने के लिए फर्जी जन्म-प्रमाणपत्र, फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट या फर्जी मार्कशीट पेश करते हैं। BNS 234 और 235 (IPC 197, 198) के तहत ऐसे डॉक्टर या बाबू को (जो फर्जी सर्टिफिकेट जारी करता है) और उस व्यक्ति को जो उसे इस्तेमाल करता है, दोनों को 'झूठी गवाही' (Perjury) के बराबर (3 से 7 साल) की सजा मिलती है।
तुलना
फर्जी दस्तावेज / प्रमाणपत्र के उपयोग पर ‘झूठी गवाही’ (धारा 193/229) के कानून ही लागू होते हैं।
Editor-in-Chief Pramod
Founder and Editor-in-Chief at StudyHub. Pramod has spent over 7 years tracking Indian government recruitments and analyzing exam trends. He oversees the StudyHub editorial board, managing a dedicated team of subject-matter experts across History, Polity, Geography, Geology, and General Sciences. His mission is to ensure that every job alert and study resource published on StudyHub is 100% verified, accurate, and helpful for competitive exam aspirants.