बघेलखण्ड का पठार: भौगोलिक, आर्थिक एवं सामाजिक अध्ययन

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बघेलखण्ड का पठार: भौगोलिक, आर्थिक एवं सामाजिक अध्ययन
बघेलखण्ड का पठार: भौगोलिक, आर्थिक एवं सामाजिक अध्ययन

बघेलखण्ड का पठार: भौगोलिक स्थिति एवं विशेषताएँ

बघेलखण्ड का पठार मध्यप्रदेश के पूर्वी भाग में अवस्थित है, जिसकी भौगोलिक सीमा सोन नदी के पूर्व तथा सोन घाटी के दक्षिण में विस्तारित है। इसका अक्षांशीय विस्तार 23°40′ उत्तरी अक्षांश से 24°35′ उत्तरी अक्षांश तक तथा देशांतर 80°05′ पूर्वी देशांतर से 82°35′ पूर्वी देशांतर तक सीमित है। इस क्षेत्र में सिंगरौली, सीधी, उमरिया एवं शहडोल प्रमुख जिले हैं।

भौगोलिक संरचना के आधार पर यह क्षेत्र आद्य महाकल्प तथा जुरैसिक युग की शैल संरचनाओं से निर्मित है, किंतु इसकी विशेषता गोंडवाना समूह की चट्टानों में निहित है, जिनमें कोयला भंडार पाए जाते हैं। यह प्रदेश मध्यप्रदेश के प्रमुख कोयला क्षेत्रों में से एक है। बघेलखंड का ऊँचा पठार वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य का भाग बन चुका है, जबकि अपेक्षाकृत निम्न पठारी क्षेत्र मध्यप्रदेश में स्थित है।

अपवाह तंत्र एवं जल विभाजक

बघेलखण्ड क्षेत्र की प्रमुख नदियाँ जोहिला, गोपद, बनास एवं रिहन्द हैं, जो इस पठार का जल सोन नदी की ओर प्रवाहित करती हैं। यहाँ स्थित ऊँचा पठार (देवगढ़) सोन एवं महानदी के जल विभाजक के रूप में कार्य करता है।

सिंगरौली बेसिन, जो रिहन्द नदी के अपवाह क्षेत्र में स्थित है, कोयला खनन का प्रमुख केंद्र है। इस क्षेत्र में कोयला संसाधनों पर आधारित कई ताप विद्युत संयंत्र स्थापित किए गए हैं, जो ऊर्जा उत्पादन में महत्त्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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जलवायु एवं वर्षा

बघेलखण्ड पठार की जलवायु मानसूनी प्रकृति की है। यहाँ औसत वार्षिक वर्षा 125 सेंटीमीटर से अधिक होती है, जो पूर्व दिशा की ओर बढ़ती जाती है।

जनसंख्या वितरण एवं सामाजिक संरचना

इस क्षेत्र में जनसंख्या घनत्व अपेक्षाकृत कम है। अधिकांश भागों में ग्रामीण जनसंख्या 125-158 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर के आसपास पाई जाती है। यहाँ कृषि पर निर्भर जनसंख्या का प्रतिशत अधिक है, जो क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को प्राथमिक रूप से कृषि आधारित बनाता है।

यातायात एवं संचार सुविधाएँ

बघेलखण्ड क्षेत्र का भू-आकृतिक स्वरूप वनाच्छादित एवं पहाड़ी होने के कारण यहाँ परिवहन सुविधाएँ सीमित हैं। रेलवे मार्ग इस क्षेत्र की दक्षिणी एवं पश्चिमी सीमा से होकर गुजरते हैं, किंतु आंतरिक भागों में आवागमन की सुविधाएँ अपेक्षाकृत कम विकसित हैं।

कृषि एवं खनिज संसाधन

इस क्षेत्र की घाटियों के समतल भूभागों में कृषि प्रमुख आर्थिक गतिविधि है। यहाँ चावल मुख्य फसल है, जबकि ज्वार, अलसी एवं तिल अन्य प्रमुख कृषि उत्पाद हैं। यह क्षेत्र रेशम तथा कोसा उत्पादन के लिए भी प्रसिद्ध है।

खनिज संसाधनों की दृष्टि से बघेलखंड कोयला भंडारों से समृद्ध क्षेत्र है। यहाँ सिंगरौली, सोहागपुर, उमरिया, झिलमिली एवं जोहिला प्रमुख कोयला खनन क्षेत्र हैं।

मृदा एवं वनस्पति

इस क्षेत्र में लाल-पीली मृदा की प्रधानता पाई जाती है। बघेलखण्ड का बड़ा भाग सघन वनाच्छादित है, जहाँ अधिकतर क्षेत्रों में वनों का विस्तार 40% से कम नहीं है। इस क्षेत्र में साल वृक्षों के सघन वन पाए जाते हैं, जबकि बाँस प्रमुख वन उत्पाद है। बाँस आधारित कागज उद्योग के अंतर्गत शहडोल जिले के अमलई में एक कागज कारखाना स्थापित किया गया है।

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महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • यह मध्यप्रदेश का सबसे पूर्वी भाग है एवं क्षेत्रफल की दृष्टि से अपेक्षाकृत छोटा है।
  • बघेलखंड पठार कोयला उत्पादन की दृष्टि से एक समृद्ध क्षेत्र है।
  • इसी क्षेत्र में मध्यप्रदेश की “ऊर्जा राजधानी” सिंगरौली स्थित है।
  • सोन नदी के दक्षिण में अनेक छोटी पर्वत श्रृंखलाएँ हैं, जिनमें उन्नतोदर घाटियाँ एवं नतोदर पहाड़ियाँ पाई जाती हैं। ये पहाड़ियाँ 450-700 मीटर ऊँचाई तक विस्तारित हैं एवं भौगोलिक दृष्टि से प्राचीन अरावली श्रेणी के समकक्ष मानी जाती हैं।

बघेलखंड का पठार प्राकृतिक संसाधनों एवं भौगोलिक विशेषताओं की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण क्षेत्र है, जो खनिज, कृषि एवं ऊर्जा उत्पादन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

बघेलखंड पठार क्या है?

बघेलखंड पठार मध्यप्रदेश के पूर्वी भाग में स्थित एक भौगोलिक क्षेत्र है, जो सोन नदी के पूर्व और सोन घाटी के दक्षिण में विस्तारित है। यह क्षेत्र मुख्य रूप से गोंडवाना समूह की चट्टानों से निर्मित है और कोयला भंडारों के लिए प्रसिद्ध है।

बघेलखंड का क्या अर्थ है?

बघेलखंड नाम “बघेल” राजवंश से लिया गया है, जिन्होंने इस क्षेत्र पर शासन किया था। “खंड” का अर्थ भूभाग होता है, अतः बघेलखंड का अर्थ है – बघेल शासकों का क्षेत्र।

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बघेलखंड के पठार का विस्तार किन राज्यों में है?

बघेलखंड पठार मुख्य रूप से मध्यप्रदेश में स्थित है, लेकिन इसका ऊँचा पठारी भाग वर्तमान में छत्तीसगढ़ का हिस्सा बन चुका है।

बघेलखंड क्षेत्र में कौन-कौन से जिले आते हैं?

बघेलखंड क्षेत्र में मध्यप्रदेश के सिंगरौली, सीधी, उमरिया और शहडोल जिले आते हैं।

बघेलखंड का पुराना नाम क्या था?

बघेलखंड का प्राचीन नाम विंध्य क्षेत्र या विंध्य पठार से संबंधित था। इसे कभी-कभी कोसल राज्य के अंतर्गत भी माना जाता था।

बघेली का प्रमुख क्षेत्र कौन सा है?

बघेली भाषा मुख्य रूप से बघेलखंड क्षेत्र में बोली जाती है, जिसमें सिंगरौली, सीधी, उमरिया और शहडोल जिले शामिल हैं।

बघेलखंड में कौन सी मिट्टी पाई जाती है?

बघेलखंड में मुख्य रूप से लाल-पीली मिट्टी पाई जाती है, जो कृषि के लिए उपयुक्त होती है।

बघेलखंड का प्रसिद्ध नृत्य क्या है?

बघेलखंड क्षेत्र में “राई नृत्य” प्रसिद्ध है, जिसे पारंपरिक उत्सवों और सांस्कृतिक आयोजनों में प्रस्तुत किया जाता है।

बघेलखंड का नाम बघेलखंड क्यों पड़ा?

इस क्षेत्र पर “बघेल” वंश के राजाओं का शासन था, जिसके कारण इसे बघेलखंड नाम से जाना जाता है।

बघेलखंड पठार में कौन सी नदी बहती है?

बघेलखंड पठार से जोहिला, गोपद, बनास और रिहन्द नदियाँ बहती हैं, जो सोन नदी की ओर प्रवाहित होती हैं।

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