Aamer Ka Kchhvaha Vnsh Free Mock Test – Part 7
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Aamer Ka Kchhvaha Vnsh Free Mock Test – Part 7
Exam Summary
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Detailed Solutions
सवाई जयसिंह के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : कथन -I : सवाई जयसिंह ने खगोल विज्ञान के ज्ञान को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली, मथुरा, बनारस, उज्जैन और जयपुर में पाँच वेधशालाएँ बनवाई। कथन -II : मुगल बादशाह अकबर ने उनका नाम सवाई जयसिंह रखा क्योंकि वे कई मामलों में जयसिंह प्रथम से एक कदम आगे थे। नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए।
(द) केवल कथन I सही है Explanation: केवल कथन I सही है व्याख्या : सवाई जयसिंह II ने खगोल विज्ञान के लिए दिल्ली, मथुरा, बनारस, उज्जैन और जयपुर में पाँच वेधशालाएँ (जंतर मंतर) बनवाए। बिशन सिंह के उपरान्त मात्र 12 वर्ष की अवस्था में जयसिंह द्वितीय शासक बना। इसका मूल नाम विजयसिंह था और उसके छोटे भाई का नाम जयसिंह था। औरंगजेब ने दोनों भाईयों के नाम परस्पर परिवर्तित करके उसे सवाई की उपाधि से विभूषित किया और वह सवाई जयसिंह के नाम से विख्यात हो गया। सवाई जयसिंह का उपनाम मुगल बादशाह औरंगजेब ने दिया था, न कि अकबर ने।
फतेहपुर के युद्ध में जॉर्ज थॉमस को किसने हराया –
(स) सवाई प्रताप सिंह Explanation: सवाई प्रताप सिंह व्याख्या : फतेहपुर का युद्ध (1799 ई.) सीकर : मार्च 1799 में, राजस्थान के फतेहपुर (वर्तमान सीकर ज़िला) में फतेहपुर का युद्ध लड़ा गया। यह वामन राव और जनरल जॉर्ज थॉमस एंडरसन (झांझ फिरंगी) के नेतृत्व में ग्वालियर के मराठों और महाराजा सवाई प्रताप सिंह और रोरा रामजी खवास के नेतृत्व में जयपुर के सैनिकों के बीच लड़ा गया था। जयपुर के महाराजा मराठों को भुगतान में देरी कर रहे थे, और मराठों ने अपना सारा बकाया वसूलने के लिए यह युद्ध छेड़ा था। जयपुर की निर्णायक जीत हुई।
सम्राट अकबर की संप्रभुता को स्वीकार करने वाला राजपूताना का पहला शासक कौन था –
(ब) राजा भारमल Explanation: राजा भारमल व्याख्या : सांभर नामक स्थान पर 6 फरवरी, 1562 ई. को भारमल ने अपनी कन्या हरकाबाई (शाहीबाई/यौद्धाबाई) का विवाह अकबर से कर दिया। भारमल पहला राजपूत शासक था जिसने मुगलों की अधीनता को स्वीकार कर उनसे वैवाहिक सम्बन्ध स्थापित किए। अकबर ने हरकाबाई को ‘मरियम उज जमानी’ की उपाधि से विभूषित किया था। इसी ने बाद में सलीम (जहांगीर) को जन्म दिया।
तुंगा के मैदान में सवाई प्रताप सिंह द्वारा पराजित मराठा सेनापति का नाम क्या है –
(ब) महाद जी सिंधिया Explanation: महाद जी सिंधिया व्याख्या : तुंगा का युद्ध (1787 ई.) (जयपुर) : यह युद्ध सवाई प्रतापसिंह व माधावराज सिंधिया के मध्य जयपुर ग्रामीण में लड़ा गया था। जिसमें सवाई प्रतापसिंह की विजय हुई थी। सवाई प्रतापसिंह के साथ जोधपुर के महाराजा विजयसिंह थे। प्रतापसिंह का सेनापति सूरजमल शेखावत (बिसाऊ के ठाकुर) था। जिसकी 8 खम्भों की छतरी तूंगा (जयपुर) में बनी हुयी है।
जय सिंह द्वितीय द्वारा लड़ी गई अंतिम लड़ाई कौन-सी थी –
(अ) गंगवाना का युद्ध Explanation: गंगवाना का युद्ध व्याख्या : 1741 ई. गंगवाना का युद्ध जोधपुर शासक अभयसिंह तथा सवाई जयसिंह के मध्य हुआ जिसमें जयसिंह ने विजय प्राप्त की।
किस राजपूत राज्य ने 1844 ई. में कन्या भ्रूण वध को गैर कांनूनी घोषित किया –
(द) जयपुर Explanation: जयपुर व्याख्या : महाराजा रामसिंह के नाबालिग होने के कारण जयपुर राज्य के प्रशासन को ब्रिटिश सरकार ने अपने संरक्षण में ले लिया। मेजर जॉन लुडलो ने जनवरी, 1843 ई. में जयपुर का प्रशासन संभाला। उन्होंने सती प्रथा, दास प्रथा, कन्या वध एवं दहेज प्रथा आदि पर रोक लगाने के आदेश जारी किये। महाराजा रामसिंह को वयस्क होने के बाद शासन के समस्त अधिकार प्रदान किये गये। 1857 ई. के स्वतंत्रता संग्राम में महाराजा रामसिंह ने अंग्रेजों की भरपूर सहायता की।
सवाई जय सिंह ने वर्ष 1734 में मराठों का प्रभावी ढंग से सामना करने और राजस्थान में उनके प्रवेश को रोकने के लिए राजस्थान के सभी शासकों का एक सम्मेलन आयोजित किया। इस सम्मेलन को क्या नाम दिया गया –
(अ) हुरडा सम्मेलन Explanation: हुरडा सम्मेलन व्याख्या : सवाई जयसिंह ने राजस्थान में बढ़ती हुई मराठा शक्ति का प्रतिरोध करने के लिए मेवाड़ के जगतसिंह द्वितीय की अध्यक्षता में 17 जुलाई, 1734 ई. को हुरड़ा सम्मेलन का आयोजन भीलवाड़ा में करवाया, किन्तु राजपूत रियासतों को एकजुट करने का यह प्रयत्न विफल हो गया। इस सम्मेलन में मेवाड़ के महाराणा जगतसिंह द्वितीय, जयपुर के सवाई जयसिंह, जोधपुर के अभयसिंह, कोटा के दुर्जनशाल, बीकानेर के जोरावरसिंह, नागौर के बख्तसिंह, बूँदी के दलेलसिंह, करौली के गोपालसिंह और किशनगढ़ के राजसिंह आदि शासकों ने भाग लिया।
निम्नलिखित में से किस कछवाहा शासक ने दौसा पर अधिकार किया था –
(अ) दूल्हा राय Explanation: दूल्हा राय व्याख्या : दौसा में चौहान और बड़गुर्जरों का शासन था। लेकिन आपसी शत्रुता बढ़ने पर चौहानों ने अपने जवाई दुल्हाराय को आमंत्रित किया। दुल्हाराय ने बड़गुर्जरों को पराजित कर दिया। रालपसी ने दौसा का क्षेत्र दुल्हाराय को दे दिया। दुल्हाराय ने अपने पिता सोढ़ा देव को दौसा का शासक बनाया।
आमेर के राजा मानसिंह की निम्नलिखित प्रशासनिक नियुक्तियों को कालक्रमानुसार रखिये एवं सही विकल्प चुनिए – (A) बंगाल का गवर्नर (B) बिहार का सूबेदार (C) काबुल का सूबेदार (D) उत्तर-पश्चिमी सीमांत प्रदेश का प्रशासक
(स) (D), (C), (B), (A) Explanation: (D), (C), (B), (A) व्याख्या : राजा मानसिंह (आमेर) मुगल सम्राट अकबर के प्रमुख सेनापति थे और विभिन्न प्रशासनिक पदों पर नियुक्त हुए। मानसिंह का प्रथम अभियान बूँदी के राजा सुर्जन हाड़ा के विरूद था। मेवाड़ अभियान (हल्दीघाटी युद्ध) के बाद अकबर ने मानसिंह को 1580 ई. में उत्तर-पश्चिमी सीमान्त भागों एवं सिंध प्रदेश की सुव्यवस्था के लिए नियुक्त किया। आपसी फूट का लाभ उठाफर मानसिंह ने काबुल पर मुगल शक्ति का अधिकार स्थापित करने में सफलता दिखायी। इन सेवाओं के उपलक्ष्य में सम्राट ने कुँवर मानसिंह को काबुल का सूबेदार नियुक्त कर दिया। काबुल से मानसिंह का स्थानान्तरण बिहार कर दिया गया, क्योंकि वहां स्थानीय जमींदारों के उपद्रव हो रहे थे और कई छोटे-छोटे राजा मुगल सत्ता की अवहेलना कर मनमानी करते थे। मानसिंह 1587 से 1594 ई. तक बिहार के सुबेदार था। मानसिंह की सेवाओं से प्रसन्न होकर 1594 ई. में सम्राट ने उसे बंगाल सूबेदार बनाया।
राजस्थान के उस शासक का नाम बताइए जो प्राचीन वैदिक अनुष्ठान अश्वमेध यज्ञ करने वाला अंतिम हिन्दू शासक था।
(ब) सवाई जय सिंह Explanation: सवाई जय सिंह व्याख्या : सवाई जयसिंह ने हुरड़ा सम्मेलन (1734 ई.) के एक माह बाद ही प्रथम अश्वमेध यज्ञ किया था। यज्ञ अगस्त, 1734 ई. को संपूर्ण हो गया। 1742 ई. में दूसरा अश्वमेध अधिक बड़े पैमाने पर किया गया। इस यज्ञ का घोड़ा जयपुर नगर में छोड़ा गया जिसको सुवर्ण पटिटका बांधकर चारों ओर घुमाया गया। बताया जाता है कि कुंभाणी राजपूतों ने इस घोड़े को रोककर अपने वंश-गौरव का परिचय दिया। कुमाणी राजपूत भगत सिंह ने अश्व को पकड़कर युद्ध के लिए ललकारा था और चांदपोल दरवाजे पर लड़ते हुए कुर्बानी भी दी थी।
जयपुर में ‘जंतर – मंतर’ खगोलीय वेधशाला किसने निर्मित की थी –
(स) महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय Explanation: महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय व्याख्या : सवाई जयसिंह ने जयपुर, दिल्ली, मथुरा, उज्जैन, और बनारस में पाँच वैद्यशालाएँ स्थापित की। सबसे बड़ी वैद्यशाला जयपुर का जंतरमंतर है जिसकी स्थापना 1728 ई में की गई। इसका सबसे बड़ा यंत्र सम्राट यंत्र है जो विश्व की सबसे बड़ी सौर घड़ी माना जाता है, रामयंत्र, जयप्रकाशयंत्र भी यहाँ स्थित है। जयपुर वैद्यशाला को 2010 की यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में भी शामिल किया गया है।
नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (Assertion) A के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason) R के रूप में; अभिकथन A: 1799 AD में महाराजा सवाई प्रताप सिंह द्वारा हवा महल बनवाया गया था। कारण R: यह रानियों के लिए बनवाया गया था ताकि वे महल के अंदर बैठकर शहर के मेलों, त्यौहारों और जुलूसों / सवारियों को देख सकें। उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए –
(अ) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है। Explanation: A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है। व्याख्या : 1799 AD में महाराजा सवाई प्रताप सिंह द्वारा हवा महल बनवाया गया था। यह रानियों के लिए बनवाया गया था ताकि वे महल के अंदर बैठकर शहर के मेलों, त्यौहारों और जुलूसों / सवारियों को देख सकें।
निम्नलिखित ऐतिहासिक घटनाओं को कालक्रमानुसार व्यवस्थित करें। (a) तुंगा का युद्ध (b) बगरू का युद्ध (c) हुरड़ा सम्मेलन (d) औरंगजेब की मृत्यु नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें :
(ब) (d), (c), (b), (a) Explanation: (d), (c), (b), (a) व्याख्या : तुंगा का युद्ध (1787 ई.) (जयपुर): यह युद्ध सवाई प्रतापसिंह व माधावराज सिंधिया के मध्य जयपुर ग्रामीण में लड़ा गया था। जिसमें सवाई प्रतापसिंह की विजय हुई थी। सवाई प्रतापसिंह के साथ जोधपुर के महाराजा विजयसिंह थे। सवाई जयसिंह ने राजस्थान में बढ़ती हुई मराठा शक्ति का प्रतिरोध करने के लिए मेवाड़ के जगतसिंह द्वितीय की अध्यक्षता में 17 जुलाई, 1734 ई. को हुरड़ा सम्मेलन का आयोजन भीलवाड़ा में करवाया, किन्तु राजपूत रियासतों को एकजुट करने का यह प्रयत्न विफल हो गया। बगरु का युद्ध (1748 ई.) : जयपुर के उत्तराधिकार को लेकर ईश्वरीसिंह एवं माधोसिंह के मध्य पुनः 1748 ई. में बगरु का युद्ध हुआ। इस बार पेशवा व होल्कर की सेनाएँ माधोसिंह के पक्ष में थी। अतः बगरु के युद्ध में ईश्वरीसिंह की पराजय हुई। 1707 ई. में औरंगजेब की मृत्यु
नीचे दो कथन दिए गए हैं : एक अभिकथन A (Assertion A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण R (Reason R) के रूप में : अभिकथन A: हुरडा सम्मेलन की अध्यक्षता जगत सिंह II (द्वितीय) द्वारा की गई थी। कारण R: हुरडा सम्मेलन राजस्थान के विभिन्न शासकों के मध्य एकता बनाए रखने का सफल प्रयास था। उपरोक्त कथनों के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:
(द) A सही है लेकिन R सही नहीं है। Explanation: A सही है लेकिन R सही नहीं है। व्याख्या : सवाई जयसिंह ने राजस्थान में बढ़ती हुई मराठा शक्ति का प्रतिरोध करने के लिए मेवाड़ के जगतसिंह द्वितीय की अध्यक्षता में 17 जुलाई, 1734 ई. को हुरड़ा सम्मेलन का आयोजन भीलवाड़ा में करवाया, किन्तु राजपूत रियासतों को एकजुट करने का यह प्रयत्न विफल हो गया। इस सम्मेलन में मेवाड़ के महाराणा जगतसिंह द्वितीय, जयपुर के सवाई जयसिंह, जोधपुर के अभयसिंह, कोटा के दुर्जनशाल, बीकानेर के जोरावरसिंह, नागौर के बख्तसिंह, बूँदी के दलेलसिंह, करौली के गोपालसिंह और किशनगढ़ के राजसिंह आदि शासकों ने भाग लिया।
