Aarthik Smiksha 2024-25 Free Mock Test – Part 6
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Aarthik Smiksha 2024-25 Free Mock Test – Part 6
Exam Summary
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Detailed Solutions
ग्रामीण गैर-कृषि विकास एजेंसी (RUDA) के तीन मुख्य क्षेत्र कौन से हैं –
(अ) चमड़ा, ऊन व कपड़ा, लघु खनिज Explanation: चमड़ा, ऊन व कपड़ा, लघु खनिज व्याख्या : नवंबर 1995 में स्थापित ग्रामीण गैर-कृषि विकास एजेंसी (RUDA) का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण गैर-कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देना और दस्तकार परिवारों को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना है। 3 मुख्य क्षेत्र: चमड़ा, ऊन व कपड़ा तथा लघु खनिज। पोकरण पोटरी, ब्लू पोटरी, सांगानेर प्रिंट, बगरू प्रिंट, कोटा डोरिया आदि हस्तशिल्पों के लिए रूडा ने जीआई टैग प्राप्त किया है।
2024-25 में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र का राजस्थान के सकल राज्य मूल्य वर्धन (GSVA) में योगदान प्रचलित मूल्य पर कितना है –
(ब) 26.92% Explanation: 26.92% व्याख्या : प्रचलित मूल्य पर कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र का सकल राज्य मूल्य वर्धन (GSVA) में योगदान 26.92% है।
2024-25 में कृषि के उपक्षेत्रों में सबसे अधिक योगदान किसका है –
(अ) फसल Explanation: पशुधन व्याख्या : कृषि का उपक्षेत्र योगदान (%) पशुधन 46.77 फसल 46.17 वानिकी एवं लॉगिंग 6.56 मत्स्य 0.51
2023-24 में राजस्थान में शुद्ध बोया गया क्षेत्रफल कितना प्रतिशत है –
(अ) 6.89% Explanation: 53.10% व्याख्या : शुद्ध बोया गया क्षेत्रफल Net Sown Area 53.10% बंजर भूमि Waste land 10.26% वानिकी Forest land 8.13% ऊसर तथा कृषि अयोग्य भूमि Barren and uncultivable land 6.89% अन्य चालू पड़त भूमि 5.05% कृषि के अतिरिक्त अन्य उपयोग भूमि 5.92%
कृषि जनगणना 2015-16 के अनुसार, राजस्थान में कुल प्रचालित भूमि जोतों की संख्या कितनी थी –
(अ) 68.88 लाख Explanation: 76.55 लाख व्याख्या : कृषि जनगणना 2010-11 कृषि जनगणना 2015-16 कुल जोतों का क्षेत्रफल 211.36 लाख हेक्टेयर 208.73 लाख हेक्टेयर कुल प्रचालित भूमि जोतों की संख्या 68.88 लाख 76.55 लाख भूमि जोतों का औसत आकार 3.07 हेक्टेयर 2.73 हेक्टेयर महिला प्रचालित जोत धारक 5.46 लाख 7.75 लाख (76.55 में से)
2024-25 में राजस्थान में कुल खाद्यान्न उत्पादन कितना था –
(ब) 267.67 लाख मैट्रिक टन Explanation: 267.67 लाख मैट्रिक टन व्याख्या : कुल खाद्यान्न उत्पादन = 267.67 लाख मैट्रिक टन। (103.71 खरीफ + 163.96 रबी)
राजस्थान का कृषि उत्पादन में पहला स्थान किन उत्पादों में है –
(ब) बाजरा, सरसों, ग्वार, कुल तिलहन Explanation: बाजरा, सरसों, ग्वार, कुल तिलहन व्याख्या : पहला:- बाजरा, सरसों व राई, ग्वार, कुल तिलहन, पोषक अनाज। दूसरा:- मूंगफली तीसरा:- सोयाबीन, चना, ज्वार, कुल दलहन
कृषि जनगणना 2010-11 से 2015-16 के बीच महिला प्रचालित जोत धारकों में कितने प्रतिशत की वृद्धि हुई –
(ब) 41.94% Explanation: 41.94% व्याख्या : कुल जोतों के क्षेत्रफल में कमी:- -1.24% महिला प्रचालित जोत धारक में वृद्धि:- 41.94%
राजस्थान में शुष्क पश्चिमी मैदानी क्षेत्र (I-A) में खरीफ की मुख्य फसलें कौन सी हैं –
(ब) बाजरा, मोंठ, तिल Explanation: बाजरा, मोंठ, तिल व्याख्या : शुष्क पश्चिमी मैदानी क्षेत्र (I-A) में खरीफ की मुख्य फसलें बाजरा, मोंठ, तिल और रबी की फसलें गेंहू, सरसों, जीरा हैं
राजस्थान में ग्वार उत्पादन में देश में कौन सा स्थान है और इसका योगदान कितना है –
(अ) पहला, 90.36% Explanation: पहला, 90.36% व्याख्या : फसल प्रथम स्थान द्वितीय स्थान तृतीय स्थान राज. का योगदान ग्वार राजस्थान हरियाणा गुजरात 90.36 बाजरा उत्तर प्रदेश गुजरात 44.66 सरसों व राई उत्तर प्रदेश मध्यप्रदेश 46.13 कुल तिलहन मध्यप्रदेश गुजरात 22.78 पोषक अनाज कर्नाटक मध्यप्रदेश 15.66 मूंगफली गुजरात राजस्थान तमिलनाडु 18.76 ज्वार महाराष्ट्र कर्नाटक राजस्थान 14.87 चना महाराष्ट्र मध्यप्रदेश 14.75 कुल दलहन मध्यप्रदेश महाराष्ट्र 13.88 सोयाबीन महाराष्ट्र मध्यप्रदेश 8.05
राजस्थान में पहली बार अलग से कृषि बजट कब पेश किया गया था –
(स) 2022-23 Explanation: 2022-23 व्याख्या : मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 2021-22 के लिए प्रदेश का पहला पेपरलेस बजट पेश किया। प्रदेश का 2022-23 का पहला कृषि बजट भी अलग से पेश किया गया है।
मुख्यमंत्री बीज स्वावलंबन योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है –
(ब) किसानों द्वारा स्वयं के खेतों में गुणवत्तापूर्ण बीजों के उत्पादन को बढ़ावा देना Explanation: किसानों द्वारा स्वयं के खेतों में गुणवत्तापूर्ण बीजों के उत्पादन को बढ़ावा देना व्याख्या : मुख्यमंत्री बीज स्वावलंबन योजना (2017) उद्देश्य:- किसानों द्वारा स्वयं के खेतों में गुणवत्तापूर्ण बीजों के उत्पादन को बढ़ावा देना। यह योजना राज्य के सभी 10 कृषि जलवायु क्षेत्रों में लागू की गई है। इस योजना के तहत फसलों की विभिन्न किस्मों का बीज उत्पादन 10 साल तक लिया जा रहा है।
गोवर्धन जैविक उर्वरक योजना के तहत प्रत्येक ब्लॉक में कितने किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है –
(ब) 50 Explanation: 50 व्याख्या : गोवर्धन जैविक उर्वरक योजना उद्देश्य: किसानों को रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने तथा जैविक उर्वरक, जैविक खाद और नैनों उर्वरक अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना। प्रत्येक ब्लॉक में 50 किसानों को ₹10,000 तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है जिससे वे पशु अपशिष्ट का उपयोग करके जैविक खाद (वर्मी-कम्पोस्ट) का उत्पादन कर सके।
नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत कितने महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) को ड्रोन और सहायक उपकरणों के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी –
(ब) 1000 Explanation: 1000 व्याख्या : नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत 1000 महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) को ड्रोन एवं सहायक उपकरणों की खरीद के लिए वित्तीय सहायता, क्षमता निर्माण एवं सतत सहयोग प्रदान किया जाएगा। ड्रोन तकनीक के माध्यम से नैनो यूरिया एवं कीटनाशकों के छिड़काव से उर्वरकों एवं कीटनाशकों का सटीक और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित होगा।
कृषि अवसंरचना निधि (AIF) की घोषणा कब की गई थी –
(अ) 15 मई 2020 Explanation: 15 मई 2020 व्याख्या : केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा किसानों के लिए फार्म गेट अवसंरचना तैयार करने के लिए ₹1 लाख करोड़ के कृषि अवसंरचना निधि की घोषणा 15 मई 2020 को की गई। इसके तहत ₹2 करोड़ की सीमा तक के सभी ऋणों पर 3% प्रतिवर्ष की दर से ब्याज सहायता दी जाती है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ फसलों के लिए कितना प्रीमियम लिया जाता है –
(अ) 1.5% Explanation: 2% व्याख्या : प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2016 से प्रारम्भ की गई है। उद्देश्य : प्राकृतिक आपदा के कारण होने वाले फसल नुकसान का बीमा कवर प्रदान करना। कृषक से निम्न प्रीमियम राशि लेकर बीमा किया जा रहा है – रबी = 1.5% खरीफ फसल = 2% वाणिज्यिक/बागवानी = 5%
राजस्थान में देश के कुल सतही जल का कितना प्रतिशत उपलब्ध है –
(अ) 1.16% Explanation: 1.16% व्याख्या : राजस्थान में देश के कुल सतही जल (Surface water) का 1.16% है।
राजस्थान में कुल सिंचित क्षेत्र कितना है –
(ब) 95,47,992 हेक्टेयर Explanation: 95,47,992 हेक्टेयर व्याख्या : कुल सिंचित क्षेत्र:- 95,47,992 हेक्टेयर
राम जल सेतु लिंक परियोजना का वित्तपोषण अनुपात क्या है –
(ब) केंद्र (90) : राज्य (10) Explanation: केंद्र (90) : राज्य (10) व्याख्या : संशोधित पार्बती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना (एकीकृत ERCP) (नया नाम: राम जल सेतु लिंक परियोजना) राज्य: राजस्थान और मध्यप्रदेश केंद्र सरकार की नदी जोड़ो परियोजना में शामिल। वित्तपोषण: केंद्र (90) : राज्य (10) मानसून के दौरान चंबल नदी के सहायक नदी बेसिनों (कुनू, कूल, पार्बती, कालीसिंध, मेज) में उपलब्ध अधिशेष (Surplus) जल को बनास, मोरेल, बाणगंगा, गंभीरी और पार्वती नदी बेसिनों में स्थानांतरित किया जायेगा। यह परियोजना पूर्वी राजस्थान के 17 जिलों को पीने का पानी उपलब्ध कराएगी जिससे लगभग 32.5 मिलियन लोग लाभान्वित होंगे।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के सूक्ष्म सिंचाई घटक में कौन सी पद्धति शामिल है –
(ब) बूंद-बूंद और फव्वारा सिंचाई Explanation: बूंद-बूंद और फव्वारा सिंचाई व्याख्या : प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) उद्देश्य: सिंचाई कवरेज का विस्तार करना और जल उपयोग दक्षता में सुधार करना। इसमें हर खेत को पानी और प्रति बूंद अधिक फसल जैसी पहलों को शामिल किया गया है। PMKSY का सूक्ष्म सिंचाई घटक: इसके तहत बूंद-बूंद एवं फव्वारा सिंचाई पद्धति को अपनाया गया है।
मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0 की शुरुआत कब हुई थी –
(ब) फरवरी 2024 Explanation: फरवरी 2024 व्याख्या : मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0 फरवरी 2024 में शुरू। आगामी 4 वर्षों में 20 हजार गांवों में 5 लाख जल संचयन और जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया जायेगा। उद्देश्य- जल संरक्षण, जल संग्रहण, जल संचयन ढांचों का निर्माण और उपलब्ध जल स्त्रोतों के विवेकपूर्ण उपयोग को प्रोत्साहित करना।
राष्ट्रीय जल विज्ञान योजना का उद्देश्य क्या है –
(ब) सूखा प्रबंधन और जल उपयोग दक्षता में सुधार Explanation: सूखा प्रबंधन और जल उपयोग दक्षता में सुधार व्याख्या : जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय जल विज्ञान योजना 2016 -17 से 2025 (8 वर्ष) के लिए शुरू की गई है। 100% – केंद्र अनुदान। (विश्व बैंक द्वारा सहायता प्राप्त) उद्देश्य : सूखा प्रबंधन, जल उपयोग दक्षता में सुधार। इसमें स्काडा (SCADA – Supervisory control and data acquisition) सिस्टम लगाया गया है। राज्य के 7 बांधों पर स्काडा सिस्टम लगाया गया है।
नर्मदा नहर परियोजना में कौन सी सिंचाई पद्धति अनिवार्य की गई है –
(ब) फव्वारा सिंचाई Explanation: फव्वारा सिंचाई व्याख्या : नर्मदा नहर परियोजना (जालोर एवं बाड़मेर) देश की पहली वृहद् सिंचाई परियोजना है, जिसमें संपूर्ण कमांड क्षेत्र में फव्वारा सिंचाई पद्धति को अनिवार्य किया गया है।
परवन वृहद् परियोजना से किन जिलों के गांवों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई गई है –
(ब) कोटा, बारां और झालावाड़ Explanation: कोटा, बारां और झालावाड़
यमुना जल समझौते के अनुसार, राजस्थान को ताजेवाला हेड से कितना जल आवंटित किया गया है –
(अ) 1917 क्यूसेक Explanation: 1917 क्यूसेक व्याख्या : परवन वृहद् परियोजना परवन नदी पर झालावाड़ में है। इससे कोटा, बारां एवं झालावाड़ जिलों के 637 गांवों में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
