Antriksh Anusndhan Free Mock Test – Part 4
- The countdown timer will display the remaining time.
- Each correct answer carries +1 mark.
- Each wrong answer carries -0.33 negative marks.
- Exam auto-submits when time runs out.
Antriksh Anusndhan Free Mock Test – Part 4
Exam Summary
| Total Questions | 0 |
|---|---|
| Attempted | 0 |
| Answered Correctly | 0 |
| Answered Incorrectly | 0 |
| Total Score | 0 |
Detailed Solutions
उपग्रह ‘गगन’ को प्रक्षेपित करने का मुख्य उद्देश्य उपलब्ध कराना है अचूक –
(ब) पथ प्रदर्शन Explanation: पथ प्रदर्शन
वैश्विक कवरेज के लिए न्यूनतम कितने क्रियाशील अन्तरिक्ष यान आवश्यक हैं –
(द) 3
वर्ष 1957 में अन्तरिक्ष में भेजा गया पहला मानव निर्मित उपग्रह है :
(स) स्पुतनिक- I Explanation: स्पुतनिक- I
____ नासा व इसरो के मध्य दोहरी आवृत्ति संश्लिष्ट द्वारक राडार उपग्रह प्रक्षेपण करने के लिए एक संयुक्त परियोजना है –
(द) निसार Explanation: निसार
निम्नलिखित में से कौन सा सुदुर संवेदन में प्रयुक्त होने वाले सक्रिय संवेदक का उदाहरण है –
(अ) रेडार Explanation: रेडार
संचार उपग्रह के लिए सामान्यतः उपयोग में ली जाने वाली कक्षा होती है –
(स) भू-तुल्यकालिक कक्षा Explanation: भू-तुल्यकालिक कक्षा व्याख्या : भू-तुल्यकालिक कक्षा (Geosynchronous Orbit) एक दीर्घवृत्ताकार कक्षा है जो पृथ्वी के चारों ओर 35,786 किमी. -36000 किमी. की ऊँचाई पर स्थित होती है। इस कक्षा में, एक उपग्रह पृथ्वी के समान ही 24 घंटे में परिक्रमा करता है। भू-तुल्यकालिक उपग्रहों को उसी दिशा में कक्षा में प्रक्षेपित किया जाता है जिस दिशा में पृथ्वी घूम रही है। GEO का उपयोग उन उपग्रहों द्वारा किया जाता है, जिन्हें दूरसंचार उपग्रहों जैसे पृथ्वी पर एक विशेष स्थान से लगातार ऊपर रहने की आवश्यकता होती है।
चन्द्रमा की सतह पर जिस जगह विक्रम लैंडर और रोवर प्रज्ञान उतरे थे, उस स्थान को क्या कहा जायेगा –
(अ) शिव शक्ति बिन्दु Explanation: शिव शक्ति बिन्दु व्याख्या : चन्द्रमा की सतह पर जिस जगह विक्रम लैंडर और रोवर प्रज्ञान उतरे थे, उस का नाम शिव शक्ति बिन्दु रखा जायेगा। जिस जगह पर चन्द्रयान-2 का लैंडर क्रैश हुआ था उसे तिरंगा बिन्दु के नाम से जाना जायेगा।
चंद्रयान 3 के चाँद पर सफल लेंडिंग के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 अगस्त को किस दिवस के रूप में बनाने की घोषणा की है –
(अ) राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस Explanation: राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस व्याख्या : प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के रूप में मनाया जायेगा। इस दिन इसरो के चन्द्रयान मिशन ने चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट उतरकर इतिहास रचा था।
चंद्रयान-3 के प्रक्षेपण में किस प्रक्षेपण यान का उपयोग किया गया –
(अ) जीएसएलवी Explanation: जीएसएलवी व्याख्या : चंद्रयान-3 का लॉन्च सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र , श्रीहरिकोटा से 14 जुलाई, 2023 शुक्रवार को भारतीय समय अनुसार दोपहर 2:35 बजे हुआ था। चंद्रयान-3 के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला लॉन्चर GSLV-Mk3 (जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल) है। चंद्रयान-3 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का तीसरा चंद्र मिशन है। चंद्रयान-3 ने चांद की सतह पर उतर कर इतिहास रच दिया है। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक उतरने वाला भारत पहला देश बन गया है। चंद्रमा पर विक्रम लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग के बाद प्रज्ञान रोवर उसमें से निकला। इसके साथ ही भारत अमेरिका, चीन और पूर्व सोवियत संघ के बाद चंद्रमा की सतह पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया। लैंडर का मिशन जीवन एक चंद्र दिवस है, जो पृथ्वी पर 14 दिनों के बराबर है।
निम्नलिखित में से कोनसा एक आदित्य L1 मिशन से सम्बंधित सही कथन नहीं है –
(अ) आदित्य-एल1 को PSLV-C57 रॉकेट से प्रक्षेपित किया। Explanation: आदित्य- L1 इसरो का पहला खगोल विज्ञान वेधशाला-श्रेणी मिशन है। व्याख्या : हाल ही में, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने और मिशन आदित्य-एल1 को PSLV-C57 रॉकेट से प्रक्षेपित किया। आदित्य-एल1 1.5 मिलियन किलोमीटर की पर्याप्त दूरी से सूर्य का अध्ययन करने वाला पहला अंतरिक्ष आधारित वेधशाला श्रेणी का भारतीय सौर मिशन है। L1 बिंदु तक पहुंचने में इसे लगभग 125 दिन लगेगे । एस्ट्रोसैट (2015) के बाद आदित्य- एला इसरो का दूसरा खगोल विज्ञान वेधशाला श्रेणी मिशन भी है।
पृथ्वी का अपनी अक्ष के प्रति घूर्णन होता है :
(द) पश्चिम से पूर्व Explanation: पश्चिम से पूर्व
भारत की “रॉकेट वूमैन” किसे कहा जाता है?
(अ) रितु कारीधाल Explanation: रितु कारीधाल
चंद्रयान मिशन जैसे भारी पेलोड के लिए किस प्रक्षेपण यान का उपयोग किया जाता है –
(स) एलवीएम3 Explanation: एलवीएम3 व्याख्या : इसरो का शक्तिशाली एलवीएम3, तीन चरणों वाला विशालकाय, 4,000 किलोग्राम तक के पेलोड को दूर की कक्षाओं में ले जा सकता है, जिससे यह भारी उपग्रह प्रक्षेपण के लिए गेम-चेंजर बन जाता है। जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल एमके III (एलवीएम3), जिसे जीएसएलवी-एमके III के नाम से भी जाना जाता है।
चंद्रयान-3 के लैंडर ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट लैंड किस तारीख को किया था –
(अ) 14 जुलाई 2023 Explanation: 23 अगस्त 2023 व्याख्या : चंद्रयान-3 भारत का तीसरा चंद्र मिशन और चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग का दूसरा प्रयास है। 14 जुलाई 2023 को चंद्रयान-3 ने श्रीहरिकोटा में अवस्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरी थी। अंतरिक्ष यान ने 5 अगस्त 2023 को चंद्र कक्षा में निर्बाध रूप से प्रवेश किया। ऐतिहासिक क्षण तब सामने आया जब लैंडर ने 23 अगस्त 2023 को चंद्र दक्षिणी ध्रुव के निकट एक सफल लैंडिंग की। प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के रूप में मनाया जायेगा। उन्होंने कहा कि चन्द्रमा की सतह पर जिस जगह विक्रम लैंडर और रोवर प्रज्ञान उतरे थे, उस का नाम ‘शिव शक्ति’ बिन्दु रखा जायेगा। जिस जगह पर चन्द्रयान-2 का लैंडर क्रैश हुआ था उसे तिरंगा बिन्दु के नाम से जाना जायेगा।
इसरो के किस मिशन ने चंद्रमा पर पानी की बर्फ की खोज की –
(अ) चंद्रयान-1 Explanation: चंद्रयान-1 व्याख्या : भारत का ऐतिहासिक चंद्रयान-1 मिशन एक एकल यात्रा नहीं थी। हालाँकि इसने गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण में भारत की साहसिक शुरुआत को चिह्नित किया, लेकिन इसमें नासा के साथ एक महत्वपूर्ण सहयोग भी शामिल था, जिसने एक अभूतपूर्व खोज का मार्ग प्रशस्त किया। भारत की अंतरिक्ष यात्रा की महत्वाकांक्षाओं ने चंद्रमा पर अपने पहले मिशन चंद्रयान-1 के साथ एक लंबी छलांग लगाई। अक्टूबर 2008 में लॉन्च किया गया और अगस्त 2009 तक परिचालन में रहा, इस महत्वाकांक्षी प्रयास ने अंतरिक्ष अन्वेषण में भारत की बढ़ती शक्ति को प्रदर्शित किया।
मानव को अंतरिक्ष में भेजने के भारत के महत्वाकांक्षी मिशन का नाम क्या है –
(स) गगनयान Explanation: गगनयान व्याख्या : गगनयान मिशन के साथ भारत की अंतरिक्ष संबंधी महत्वाकांक्षाएं नई ऊंचाइयों पर पहुंच रही हैं, जो मनुष्यों को अंतरिक्ष में भेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह साहसिक प्रयास तीन अंतरिक्ष यात्रियों के एक दल को पृथ्वी के चारों ओर 400 किमी (250 मील) की कक्षा में लॉन्च करने की इच्छा रखता है, जहां वे हिंद महासागर में घर लौटने से पहले हमारे चमकदार नीले ग्रह को देखने में तीन दिन बिताएंगे।
चंद्रयान 3 मिशन के रोवर को कहा जाता है
(अ) विक्रम Explanation: प्रज्ञान व्याख्या : चंद्रयान-3 मिशन को इसरो ने 14 जुलाई 2023 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लांच किया था। इसरो ने चंद्रयान-3 मिशन के लैंडर को ‘विक्रम’ और ‘रोवर’ को ‘प्रज्ञान’ नाम दिया है जो एक वैज्ञानिक पेलोड है। चंद्रयान-3 मिशन 2019 के चंद्रयान-2 मिशन का अनुवर्ती है। चंद्रयान-2 का विक्रम लैंडर चंद्रमा की सतह पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।
चन्द्रयान मिशन जैसे भारी पेलोड के लिए किस प्रक्षेपण वाहन का उपयोग किया जाता है –
(स) LVM3 Explanation: LVM3
अंतरिक्ष में मानव भेजने के भारत के महत्वाकांक्षी मिशन का नाम क्या है –
(स) गगनयान Explanation: गगनयान
निम्न में से कौन सा संचार उपग्रहों द्वारा उपयोग की जाने वाली कक्षा का एक प्रकार है जो उन्हें पृथ्वी की सतह के सापेक्ष एक निश्चित स्थिति में रहने की अनुमति देता है –
(ब) भूस्थैतिक कक्षा Explanation: भूस्थैतिक कक्षा व्याख्या : भूस्थैतिक कक्षा, पृथ्वी की भूमध्य रेखा से 35,785 किलोमीटर (22,236 मील) ऊपर एक वृत्ताकार कक्षा होती है. इसे भू-समकालिक भूमध्यरेखीय कक्षा (GEO) भी कहा जाता है। इस कक्षा में उपग्रह की परिक्रमा अवधि, पृथ्वी के घूर्णन की अवधि के बराबर होती है। यानी, उपग्रह पृथ्वी के घूर्णन की दिशा में ही गति करता है। इस वजह से, भूस्थैतिक कक्षा में मौजूद उपग्रह, पृथ्वी के घूर्णन से मेल खाते हैं। पृथ्वी की सतह से देखने पर, भूस्थैतिक कक्षा में मौजूद उपग्रह हमेशा स्थिर दिखाई देते हैं।
भारत का पहला सौर मिशन आदित्य एल 1 कब लॉन्च किया गया –
(ब) 2 सितंबर, 2023 Explanation: 2 सितंबर, 2023
किस संगठन ने “व्योममित्र” नामक भारतीय रोबोट विकसित किया –
(ब) ISRO Explanation: ISRO
इसरो (ISRO) द्वारा चंद्रयान-3 मिशन के साथ भेजे गए रोवर को क्या नाम दिया गया था –
(स) प्रज्ञान Explanation: प्रज्ञान व्याख्या : चंद्रयान 3 के रोवर का नाम प्रज्ञान है, जिसका संस्कृत में अर्थ है ज्ञान।
‘इन्सेट’ का पूरा नाम क्या है –
(अ) भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह Explanation: भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह व्याख्या : भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह (इनसैट) प्रणाली भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा देश की दूरसंचार, प्रसारण, मौसम विज्ञान, तथा खोज एवं बचाव आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रक्षेपित उपग्रहों की एक श्रृंखला है।
उस अंतरिक्ष यान का नाम बताइए जो हाल ही में (जुलाई 2024 में) सूर्य-पृथ्वी लैग्रेंजियन बिंदु 1 (Lpoint) के चारों ओर अपनी पहली हेलो कक्षा पूरी करने वाला भारत का पहला अंतरिक्ष-आधारित सौर वेधशाला मिशन बन गया है।
(ब) आदित्य-L1 Explanation: आदित्य-L1 व्याख्या : 2 जुलाई 2024 को, आदित्य-एल1 अंतरिक्ष यान, लैग्रेंजियन पॉइंट 1 (एल1) पर भारत का पहला अंतरिक्ष-आधारित सौर वेधशाला मिशन, सूर्य-पृथ्वी एल1 बिंदु के चारों ओर अपनी पहली हेलो कक्षा पूरी कर लेगा। हेलो कक्षा में अंतरिक्ष यान को एल1 के चारों ओर एक चक्कर पूरा करने में 178 दिन लगते हैं।
