1. लोकपाल और लोकायुक्त का अर्थ
भ्रष्टाचार और कुप्रशासन पर नियंत्रण रखने के लिए प्रशासन के बाहर से निगरानी करने वाली संस्था को विश्व के अनेक देशों में Ombudsman कहा जाता है। भारत में इसी अवधारणा को केंद्र स्तर पर लोकपाल और राज्य स्तर पर लोकायुक्त के रूप में जाना जाता है।
“लोकपाल” शब्द संस्कृत के लोक + पाल से बना है, अर्थात् जनता का संरक्षक।
| बिंदु | तथ्य |
|---|---|
| अंतरराष्ट्रीय नाम | Ombudsman |
| भारत में केंद्रीय संस्था | लोकपाल |
| भारत में राज्य स्तरीय संस्था | लोकायुक्त |
| मुख्य उद्देश्य | कुप्रशासन, भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के विरुद्ध शिकायतों की जांच |
| भारत में ‘लोकपाल/लोकायुक्त’ नाम | डॉ. एल. एम. सिंघवी द्वारा 1963 में लोकप्रिय किया गया |
🔑 परीक्षा बिंदु: लोकपाल = केंद्र, लोकायुक्त = राज्य।
2. लोकायुक्त संस्था की अंतरराष्ट्रीय पृष्ठभूमि
लोकायुक्त की जड़ें स्वीडन की Ombudsman व्यवस्था में मिलती हैं।
1713 में स्वीडन के राजा चार्ल्स XII ने कानून का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों पर नजर रखने के लिए एक अधिकारी नियुक्त किया। बाद में 1809 के स्वीडिश संविधान में ‘Ombudsman for Justice’ की औपचारिक व्यवस्था की गई।
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1713 | स्वीडन में प्रारंभिक Ombudsman व्यवस्था |
| 1809 | स्वीडिश संविधान में Ombudsman for Justice की व्यवस्था |
| 1963 | भारत में ‘लोकपाल/लोकायुक्त’ नाम को डॉ. एल. एम. सिंघवी ने लोकप्रिय किया |
| 1966 | भारत में प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग |
| 1971 | महाराष्ट्र में प्रथम लोकायुक्त संस्था |
| 1973 | राजस्थान में लोकायुक्त संस्था |
| 2014 | लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम के प्रावधान प्रभावी |
💡 परीक्षा ट्रिक:
स्वीडन → Ombudsman → भारत → लोकपाल/लोकायुक्त
3. भारत में लोकपाल-लोकायुक्त की अवधारणा
5 जनवरी 1966 को मोरारजी देसाई की अध्यक्षता में प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग गठित किया गया।
आयोग ने नागरिकों की शिकायतों के निवारण से जुड़े अपने अंतरिम प्रतिवेदन में केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त की स्थापना की सिफारिश की।
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| आयोग | प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग |
| गठन | 5 जनवरी 1966 |
| अध्यक्ष | मोरारजी देसाई |
| मुख्य विषय | नागरिक शिकायतों का निवारण |
| सिफारिश | केंद्र में लोकपाल, राज्यों में लोकायुक्त |
भारत में राज्यों की स्थिति
महाराष्ट्र में 1971 में लोकायुक्त संस्था स्थापित हुई और राजस्थान में 1973 में।
⚠️ परीक्षा सावधानी:
ओडिशा में 1970 में लोकपाल विधेयक पारित हुआ, लेकिन लोकायुक्त पद की स्थापना बाद में हुई। इसलिए “पहला लोकायुक्त राज्य” पूछे जाने पर उत्तर महाराष्ट्र होगा।
4. राजस्थान में लोकायुक्त की स्थापना
राजस्थान में लोकायुक्त की अवधारणा अचानक नहीं आई। प्रशासनिक सुधारों की पृष्ठभूमि में 1963 में हरिश्चंद्र माथुर की अध्यक्षता में गठित प्रशासनिक सुधार समिति ने लोकायुक्त जैसी संस्था की स्थापना की सिफारिश की थी।
इसके बाद राजस्थान लोकायुक्त तथा उप-लोकायुक्त अध्यादेश, 1973 अस्तित्व में आया।
राजस्थान लोकायुक्त की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार यह व्यवस्था 3 फरवरी 1973 से प्रभावी मानी गई और अधिनियम को राष्ट्रपति की स्वीकृति 26 मार्च 1973 को प्राप्त हुई।
| तथ्य | उत्तर |
|---|---|
| अधिनियम | राजस्थान लोकायुक्त तथा उप-लोकायुक्त अधिनियम, 1973 |
| अधिनियम संख्या | 9, सन् 1973 |
| प्रवर्तन | 3 फरवरी 1973 |
| राष्ट्रपति की स्वीकृति | 26 मार्च 1973 |
| प्रथम लोकायुक्त | न्यायमूर्ति आई. डी. दुआ |
| प्रथम उप-लोकायुक्त | के. पी. यू. मेनन |
🔑 परीक्षा बिंदु: राजस्थान लोकायुक्त अधिनियम अधिनियम संख्या 9, सन् 1973 है।
5. राजस्थान के प्रथम लोकायुक्त — न्यायमूर्ति आई. डी. दुआ
राजस्थान के पहले लोकायुक्त न्यायमूर्ति आई. डी. दुआ थे।
राजस्थान लोकायुक्त की आधिकारिक सूची के अनुसार उनका कार्यकाल 28 अगस्त 1973 से 27 अगस्त 1978 तक रहा।
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| राजस्थान के प्रथम लोकायुक्त | न्यायमूर्ति आई. डी. दुआ |
| कार्यकाल प्रारंभ | 28 अगस्त 1973 |
| कार्यकाल समाप्त | 27 अगस्त 1978 |
💡 परीक्षा ट्रिक:
“दुआ से शुरू हुआ राजस्थान का लोकायुक्त सफर।”
6. राजस्थान लोकायुक्त की प्रकृति
राजस्थान लोकायुक्त एक वैधानिक एवं स्वतंत्र संस्था है। इसका गठन राजस्थान लोकायुक्त तथा उप-लोकायुक्त अधिनियम, 1973 के अंतर्गत हुआ।
इसका मूल उद्देश्य है—लोक सेवकों के विरुद्ध भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग, कदाचार और अकर्मण्यता से संबंधित शिकायतों की स्वतंत्र जांच करना।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| प्रकृति | वैधानिक |
| स्वरूप | स्वतंत्र संस्था |
| आधार | 1973 का अधिनियम |
| मुख्य उद्देश्य | भ्रष्टाचार एवं पद के दुरुपयोग की जांच |
| कार्य क्षेत्र | राजस्थान राज्य |
7. लोकायुक्त की नियुक्ति
राजस्थान में लोकायुक्त की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं।
नियुक्ति से जुड़े प्रावधानों में मुख्यमंत्री, विधानसभा में विपक्ष के नेता तथा राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की भूमिका महत्वपूर्ण है।
| बिंदु | तथ्य |
|---|---|
| नियुक्ति करने वाला | राज्यपाल |
| नियुक्ति के लिए प्रमुख परामर्श | मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष एवं उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश |
| पात्रता | अधिनियम के अनुसार निर्धारित न्यायिक पदों पर रहे व्यक्ति |
⚠️ परीक्षा सावधानी: नियुक्ति राज्यपाल करते हैं; लोकायुक्त स्वयं अपने पद पर नियुक्त नहीं होता।
8. लोकायुक्त का कार्यकाल
राजस्थान में लोकायुक्त के कार्यकाल को लेकर परीक्षाओं में भ्रम पैदा होता है।
एक समय कार्यकाल 8 वर्ष किया गया था, लेकिन बाद के संशोधन के बाद इसे पुनः 5 वर्ष कर दिया गया।
वर्तमान परीक्षा-उपयोगी तथ्य:
लोकायुक्त का कार्यकाल = 5 वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो।
| तथ्य | उत्तर |
|---|---|
| कार्यकाल | 5 वर्ष |
| आयु सीमा | 65 वर्ष |
| लागू शर्त | जो भी पहले हो |
| पुनर्नियुक्ति | नहीं |
💡 परीक्षा ट्रिक:
“लोकायुक्त = 5 और 65”
5 वर्ष या 65 वर्ष — जो पहले आए।
9. राजस्थान के लोकायुक्तों की सूची
राजस्थान लोकायुक्त सचिवालय की आधिकारिक सूची के अनुसार 13वें लोकायुक्त तक का क्रम इस प्रकार है।
| क्रम | लोकायुक्त | कार्यकाल |
|---|---|---|
| 1 | न्यायमूर्ति आई. डी. दुआ | 28-08-1973 से 27-08-1978 |
| 2 | न्यायमूर्ति डी. पी. गुप्ता | 28-08-1978 से 05-08-1979 |
| 3 | न्यायमूर्ति एम. एल. जोशी | 06-08-1979 से 07-08-1982 |
| 4 | न्यायमूर्ति के. एस. सिद्धू | 04-04-1984 से 03-01-1985 |
| 5 | न्यायमूर्ति एम. एल. श्रीमाल | 04-01-1985 से 03-01-1990 |
| 6 | न्यायमूर्ति पी. डी. कुदाल | 16-01-1990 से 06-03-1990 |
| 7 | न्यायमूर्ति एम. बी. शर्मा | 10-08-1990 से 30-09-1993 |
| 8 | न्यायमूर्ति वी. एस. दवे | 21-01-1994 से 16-02-1994 |
| 9 | न्यायमूर्ति एम. बी. शर्मा | 06-07-1994 से 06-07-1999 |
| 10 | न्यायमूर्ति मिलाप चन्द जैन | 26-11-1999 से 26-11-2004 |
| 11 | न्यायमूर्ति जी. एल. गुप्ता | 01-05-2007 से 30-04-2012 |
| 12 | न्यायमूर्ति एस. एस. कोठारी | 25-03-2013 से 07-03-2019 |
| 13 | न्यायमूर्ति प्रताप कृष्ण लोहरा | 09-03-2021 से 08-03-2026 |
13वें लोकायुक्त से जुड़ा महत्वपूर्ण अपडेट
न्यायमूर्ति प्रताप कृष्ण लोहरा राजस्थान के 13वें लोकायुक्त थे। उनका कार्यकाल 8 मार्च 2026 को समाप्त हो गया। इसलिए 2026 के वर्तमान नोट्स में उन्हें केवल “13वें लोकायुक्त” लिखना चाहिए, “वर्तमान लोकायुक्त” नहीं। आधिकारिक वेबसाइट पर भी यही कार्यकाल दर्ज है।
अगस्त 2026 तक उपलब्ध स्रोतों के अनुसार लोकायुक्त का पद रिक्त बताया जा रहा है।
🔑 2026 Current GK:
13वें लोकायुक्त — न्यायमूर्ति प्रताप कृष्ण लोहरा
कार्यकाल समाप्त — 8 मार्च 2026
अगस्त 2026 तक पद — रिक्त
10. राजस्थान के प्रथम एवं एकमात्र उप-लोकायुक्त
राजस्थान में के. पी. यू. मेनन, IAS प्रथम तथा एकमात्र उप-लोकायुक्त रहे।
उनका कार्यकाल 5 जून 1973 से 25 जून 1974 तक रहा। आधिकारिक लोकायुक्त सूची में उनके बाद किसी अन्य उप-लोकायुक्त का नाम नहीं दिया गया है।
💡 परीक्षा ट्रिक:
लोकायुक्त → आई. डी. दुआ
उप-लोकायुक्त → के. पी. यू. मेनन
11. लोकायुक्त का अधिकार क्षेत्र
लोकायुक्त को विभिन्न लोक पदाधिकारियों और लोक सेवकों के विरुद्ध निर्धारित प्रकार की शिकायतों की जांच का अधिकार है।
राजस्थान लोकायुक्त की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार इसके क्षेत्र में मंत्री, सचिव, विभागाध्यक्ष, लोक सेवक, जिला परिषदों के प्रमुख-उपप्रमुख, पंचायत समितियों के प्रधान-उपप्रधान, नगर निगमों के महापौर-उपमहापौर तथा विभिन्न स्थानीय प्राधिकरणों के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष आदि आते हैं।
| श्रेणी | उदाहरण |
|---|---|
| राज्य सरकार | मंत्री, सचिव, विभागीय अधिकारी |
| पंचायती राज | जिला प्रमुख/उपप्रमुख, प्रधान/उपप्रधान |
| नगर निकाय | महापौर/उपमहापौर, अध्यक्ष/उपाध्यक्ष |
| स्थानीय प्राधिकरण | नगर परिषद, नगरपालिका, नगर विकास न्यास |
| सरकारी संस्थाएं | अधिनियम में निर्धारित निगम, मंडल एवं कंपनियों के अधिकारी |
12. किनके विरुद्ध लोकायुक्त जांच नहीं कर सकता?
यह भाग RPSC, SI और CET में खासा महत्वपूर्ण है।
राजस्थान लोकायुक्त की आधिकारिक जानकारी के अनुसार कुछ पदाधिकारी इसके अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं। इनमें राजस्थान के मुख्यमंत्री, राजस्थान के महालेखाकार, राजस्थान लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष/सदस्य तथा निर्वाचन से जुड़े कुछ संवैधानिक पदाधिकारी शामिल हैं।
| लोकायुक्त के अधिकार क्षेत्र से बाहर | स्थिति |
|---|---|
| राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश/न्यायाधीश | जांच नहीं |
| न्यायिक सेवा के निर्धारित सदस्य | जांच नहीं |
| भारत के किसी न्यायालय के अधिकारी/कर्मचारी | जांच नहीं |
| मुख्यमंत्री, राजस्थान | जांच नहीं |
| महालेखाकार, राजस्थान | जांच नहीं |
| RPSC अध्यक्ष/सदस्य | जांच नहीं |
| निर्वाचन से संबंधित निर्धारित संवैधानिक अधिकारी | जांच नहीं |
| विधानसभा सचिवालय के अधिकारी/कर्मचारी | अधिनियम के अनुसार अपवर्जित |
| पंच/सरपंच/विधायक | सामान्यतः लोकायुक्त के अधिकार क्षेत्र से बाहर |
| सेवानिवृत्त लोक सेवक | निर्धारित स्थिति में अधिकार क्षेत्र से बाहर |
⚠️ परीक्षा सावधानी:
सबसे बड़ा trap है — “क्या लोकायुक्त मुख्यमंत्री की शिकायत की जांच कर सकता है?”
राजस्थान की आधिकारिक jurisdiction सूची में मुख्यमंत्री इसके अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं।
13. पांच वर्ष की सीमा
लोकायुक्त के संदर्भ में एक सीधा MCQ बनता है:
“राजस्थान लोकायुक्त में कितने वर्ष से अधिक पुराने मामले की शिकायत नहीं की जा सकती?”
उत्तर है — 5 वर्ष।
राजस्थान लोकायुक्त की आधिकारिक वेबसाइट स्पष्ट रूप से कहती है कि पांच वर्ष से अधिक पुराने मामले की शिकायत नहीं की जा सकती।
🔑 परीक्षा बिंदु:
5 वर्ष से अधिक पुराना मामला = लोकायुक्त के समक्ष शिकायत नहीं।
14. शिकायत प्रक्रिया
लोकायुक्त के समक्ष शिकायत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रस्तुत की जाती है। शिकायत में शिकायतकर्ता का स्पष्ट नाम-पता और आवश्यक शपथ-पत्र/दस्तावेज महत्वपूर्ण होते हैं।
लोकायुक्त सचिवालय की वेबसाइट पर शिकायत के साथ ₹10 या उससे अधिक के non-judicial stamp पर नोटरी से सत्यापित शपथ-पत्र से संबंधित निर्देश भी उपलब्ध हैं।
सामान्य प्रक्रिया को इस क्रम में समझें:
शिकायत प्रस्तुत
↓
शिकायत की प्रारंभिक जांच
↓
अधिकार क्षेत्र की जांच
↓
संबंधित लोक सेवक/विभाग से तथ्य एवं दस्तावेज
↓
आवश्यक पूछताछ/अन्वेषण
↓
आरोप सही या असत्य का निर्धारण
↓
आवश्यक होने पर सरकार को अनुशंसा15. लोकायुक्त के प्रमुख कार्य
लोकायुक्त का मूल काम केवल शिकायत सुनना नहीं है। वह शिकायत की जांच और अन्वेषण की प्रक्रिया संचालित करता है।
| कार्य | विवरण |
|---|---|
| शिकायत प्राप्त करना | लोक सेवकों/निर्धारित पदाधिकारियों के विरुद्ध |
| प्रारंभिक परीक्षण | शिकायत अधिकार क्षेत्र में है या नहीं |
| जांच | आरोपों की सत्यता की जांच |
| दस्तावेज प्राप्त करना | संबंधित विभाग से रिकॉर्ड मंगाना |
| पूछताछ | संबंधित व्यक्ति/लोक सेवक को बुलाना |
| अनुशंसा | आरोप सिद्ध होने पर सरकार को कार्रवाई की सिफारिश |
| विशेष रिपोर्ट | आवश्यक परिस्थितियों में राज्यपाल को रिपोर्ट |
🔑 परीक्षा बिंदु: लोकायुक्त का स्वरूप मुख्यतः जांच एवं अनुशंसा करने वाली संस्था का है।
16. लोकायुक्त की शक्तियां
लोकायुक्त को जांच के दौरान विभिन्न प्रकार के दस्तावेज और जानकारी प्राप्त करने की शक्ति है।
प्रमुख शक्तियां
- संबंधित लोक सेवक या विभाग से दस्तावेज मांगना।
- आवश्यक व्यक्तियों को पूछताछ के लिए बुलाना।
- संबंधित व्यक्ति से शपथ-पत्र प्राप्त करना।
- जांच के लिए आवश्यक अभिलेखों का परीक्षण करना।
- आरोपों की सत्यता का परीक्षण करना।
- आरोप सिद्ध होने पर सरकार को अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा करना।
💡 अनुभवी टिप्पणी:
लोकायुक्त को समझते समय एक बात अलग रखें—यह अदालत की तरह अंतिम दंडादेश देने वाला न्यायिक न्यायालय नहीं है। इसकी बड़ी भूमिका जांच, तथ्य-संग्रह और सरकार को अनुशंसा करने में है।
17. लोकायुक्त का वार्षिक प्रतिवेदन
लोकायुक्त अपनी गतिविधियों और शिकायतों के निस्तारण से संबंधित वार्षिक प्रतिवेदन राज्यपाल को प्रस्तुत करता है।
राज्यपाल इस प्रतिवेदन को अपने ज्ञापन सहित राज्य विधानसभा के पटल पर रखवाते हैं।
| चरण | प्रक्रिया |
|---|---|
| 1 | लोकायुक्त रिपोर्ट तैयार करता है |
| 2 | राज्यपाल को प्रस्तुत करता है |
| 3 | राज्यपाल अपना ज्ञापन संलग्न करते हैं |
| 4 | रिपोर्ट विधानसभा के पटल पर रखी जाती है |
18. लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013
केंद्र और राज्यों में लोकपाल-लोकायुक्त व्यवस्था को लेकर लंबे समय से चली आ रही मांग के बाद संसद ने लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 पारित किया।
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| अधिनियम | लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 |
| अधिनियम संख्या | 2014 का अधिनियम संख्या 1 |
| राष्ट्रपति की स्वीकृति | 1 जनवरी 2014 |
| प्रभावी | 16 जनवरी 2014 |
राजस्थान लोकायुक्त की आधिकारिक वेबसाइट भी अधिनियम के प्रावधानों के 16 जनवरी 2014 से प्रवृत्त होने की जानकारी देती है।
🔑 परीक्षा ट्रिक:
1 जनवरी 2014 → राष्ट्रपति की स्वीकृति
16 जनवरी 2014 → अधिनियम के प्रावधान प्रभावी
19. लोकायुक्त की सीमाएं और आलोचनाएं
लोकायुक्त की स्थापना का उद्देश्य प्रशासन में जवाबदेही बढ़ाना था, लेकिन इसकी प्रभावशीलता को लेकर कुछ व्यावहारिक समस्याएं बनी हुई हैं।
प्रमुख सीमाएं
| समस्या | प्रभाव |
|---|---|
| कुछ महत्वपूर्ण पदाधिकारी अधिकार क्षेत्र से बाहर | जवाबदेही सीमित |
| स्वतंत्र जांच तंत्र की कमी | जांच की गति प्रभावित |
| मानव संसाधन की कमी | लंबित मामलों की समस्या |
| अनुशंसाओं की प्रकृति | सरकारी कार्रवाई पर निर्भरता |
| जन-जागरूकता की कमी | शिकायतों की संख्या/गुणवत्ता प्रभावित |
| विधानसभा में रिपोर्ट पर सीमित चर्चा | संस्थागत प्रभाव घट सकता है |
🏛️ 20. नरपत मल लोढ़ा समिति — महत्वपूर्ण तथ्य
राजस्थान सरकार ने 28 फरवरी 2014 को लोकायुक्त कानून को अधिक प्रभावी और सशक्त बनाने के उद्देश्य से महाधिवक्ता नरपत मल लोढ़ा की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति गठित की थी। राजस्थान लोकायुक्त की आधिकारिक वेबसाइट भी इस समिति का उल्लेख करती है।
🔑 सीधा प्रश्न:
2014 में लोकायुक्त अधिनियम को मजबूत करने के लिए गठित समिति के अध्यक्ष कौन थे?
उत्तर — नरपत मल लोढ़ा।
🗝️ 21. Memory Tricks — एक नजर में
Trick 1 — स्थापना
“73 में राजस्थान का लोकायुक्त आया”
→ 1973 = Rajasthan Lokayukta
Trick 2 — प्रथम लोकायुक्त
“दुआ ने शुरुआत की”
→ I. D. Dua = First Lokayukta
Trick 3 — प्रथम उप-लोकायुक्त
“मेनन अकेले”
→ K. P. U. Menon = First & only Up-Lokayukta
Trick 4 — कार्यकाल
“लोकायुक्त = 5–65”
→ 5 वर्ष या 65 वर्ष, जो पहले हो
Trick 5 — 2026 Current Update
“लोहरा आए 2021, गए 2026”
→ Pratap Krishna Lohra = 13th Lokayukta
→ 09-03-2021 से 08-03-2026
22. Rajasthan Lokayukta — MCQs
प्रश्न 1. राजस्थान के प्रथम लोकायुक्त कौन थे?
A. न्यायमूर्ति एस. एस. कोठारी
B. न्यायमूर्ति आई. डी. दुआ
C. न्यायमूर्ति प्रताप कृष्ण लोहरा
D. न्यायमूर्ति जी. एल. गुप्ता
उत्तर: B. न्यायमूर्ति आई. डी. दुआ
प्रश्न 2. राजस्थान लोकायुक्त तथा उप-लोकायुक्त अधिनियम किस वर्ष का है?
A. 1971
B. 1972
C. 1973
D. 1974
उत्तर: C. 1973
प्रश्न 3. राजस्थान लोकायुक्त अधिनियम की अधिनियम संख्या क्या है?
A. 7
B. 8
C. 9
D. 10
उत्तर: C. 9
प्रश्न 4. राजस्थान लोकायुक्त का कार्यकाल कितना है?
A. 3 वर्ष
B. 5 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक
C. 6 वर्ष या 70 वर्ष की आयु तक
D. 8 वर्ष
उत्तर: B. 5 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक
प्रश्न 5. राजस्थान के 13वें लोकायुक्त कौन थे?
A. न्यायमूर्ति एस. एस. कोठारी
B. न्यायमूर्ति मिलाप चन्द जैन
C. न्यायमूर्ति प्रताप कृष्ण लोहरा
D. न्यायमूर्ति जी. एल. गुप्ता
उत्तर: C. न्यायमूर्ति प्रताप कृष्ण लोहरा
प्रश्न 6. न्यायमूर्ति प्रताप कृष्ण लोहरा का कार्यकाल कब समाप्त हुआ?
A. 7 मार्च 2026
B. 8 मार्च 2026
C. 9 मार्च 2026
D. 31 मार्च 2026
उत्तर: B. 8 मार्च 2026
प्रश्न 7. राजस्थान के प्रथम तथा एकमात्र उप-लोकायुक्त कौन थे?
A. के. पी. यू. मेनन
B. आई. डी. दुआ
C. डी. पी. गुप्ता
D. एम. एल. जोशी
उत्तर: A. के. पी. यू. मेनन
प्रश्न 8. पांच वर्ष से अधिक पुराने मामलों के संबंध में राजस्थान लोकायुक्त की स्थिति क्या है?
A. स्वतः जांच होती है
B. केवल राज्यपाल की अनुमति से जांच होती है
C. शिकायत नहीं की जा सकती
D. केवल मुख्यमंत्री की अनुमति से जांच होती है
उत्तर: C. शिकायत नहीं की जा सकती
प्रश्न 9. राजस्थान में लोकायुक्त की नियुक्ति कौन करता है?
A. मुख्यमंत्री
B. विधानसभा अध्यक्ष
C. राज्यपाल
D. उच्च न्यायालय
उत्तर: C. राज्यपाल
प्रश्न 10. राजस्थान लोकायुक्त संस्था किस प्रकार की संस्था है?
A. संवैधानिक
B. वैधानिक एवं स्वतंत्र
C. निजी
D. न्यायिक आयोग
उत्तर: B. वैधानिक एवं स्वतंत्र
📋 23. Quick Revision — 30 सेकंड में पूरा अध्याय
| टॉपिक | एक लाइन में तथ्य |
|---|---|
| Ombudsman की शुरुआत | स्वीडन |
| स्वीडन में संवैधानिक व्यवस्था | 1809 |
| भारत में लोकपाल/लोकायुक्त नाम | एल. एम. सिंघवी — 1963 |
| प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग | 1966 |
| अध्यक्ष | मोरारजी देसाई |
| भारत में प्रथम लोकायुक्त राज्य | महाराष्ट्र — 1971 |
| राजस्थान में स्थापना | 1973 |
| राजस्थान अधिनियम | अधिनियम संख्या 9, 1973 |
| प्रवर्तन | 3 फरवरी 1973 |
| राष्ट्रपति की स्वीकृति | 26 मार्च 1973 |
| प्रथम लोकायुक्त | आई. डी. दुआ |
| प्रथम/एकमात्र उप-लोकायुक्त | के. पी. यू. मेनन |
| नियुक्ति | राज्यपाल |
| कार्यकाल | 5 वर्ष/65 वर्ष, जो पहले हो |
| पुराने मामले की सीमा | 5 वर्ष |
| 13वें लोकायुक्त | प्रताप कृष्ण लोहरा |
| लोहरा का कार्यकाल | 09-03-2021 से 08-03-2026 |
| अगस्त 2026 स्थिति | पद रिक्त — उपलब्ध स्रोतों के अनुसार |
| 2014 समिति | नरपत मल लोढ़ा समिति |
| केंद्रीय अधिनियम | लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 |
| प्रभावी | 16 जनवरी 2014 |
🔥 Final Exam Line:
राजस्थान लोकायुक्त = 1973 + Act No. 9 + I.D. Dua + K.P.U. Menon + 5 वर्ष/65 वर्ष + 5 वर्ष पुरानी शिकायत सीमा + Pratap Krishna Lohra (13th, कार्यकाल 08 मार्च 2026 तक)।









